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Ayodhya News: आठ हजार मंदिरों में एक साथ हुई महाआरती

Fri, 27 Mar 2026 11:34 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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34-कनकभवन में रामजन्मोस्व के मौके पर सजा भगवान का​ विग्रह।-संवाद
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अयोध्या। जनम लियो रघुरइया, अवध मा बाजे बधइया… जैसे ही यह बधाई गान गूंजा, पूरी रामनगरी मानो झूम उठी। हर गली, हर मंदिर, हर द्वार पर एक ही उल्लास, एक ही भाव राम जन्म का उत्सव। सुबह की पहली किरण के साथ ही अयोध्या राममय हो उठी। जिधर नजर जाती, उधर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता दिखाई देता। 10 लाख से अधिक श्रद्धालु राम जन्मोत्सव का साक्षी बनने पहुंचे थे।
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मुख्य उत्सव श्रीरामलला के दरबार और कनक भवन में सजा, लेकिन इसकी गूंज केवल वहीं तक सीमित नहीं रही। पूरी नगरी के लगभग आठ हजार मंदिरों में एक साथ जन्मोत्सव की आरती ने अयोध्या को मानो दिव्यता की एक विशाल धारा में परिवर्तित कर दिया। दोपहर के बारह बजने से पहले ही मंदिरों के गर्भगृहों में श्रद्धालुओं की सांसें थमी हुई थीं। जैसे ही घड़ी ने बारह का संकेत दिया, कपाट खुले और भए प्रकट कृपाला, दीनदयाला…की स्वर लहरियों ने वातावरण को भक्ति में डुबो दिया। ढोल-मंजीरों की थाप पर झूमते भक्त, आंखों में आंसू और होठों पर राम, यह दृश्य शब्दों से परे था।
सबसे अधिक उल्लास कनक भवन में देखने को मिला। सुबह 11 बजे से ही यहां भक्तों ने डेरा जमा लिया था। कोई नृत्य कर रहा था, कोई भजन गा रहा था, तो कोई बस हाथ जोड़े हुए प्रभु की एक झलक पाने को आतुर खड़ा था। जैसे ही जन्म आरती शुरू हुई, पूरा प्रांगण भक्ति के उत्साह में थिरक उठा। हरे रामा, रामा, रामा…के भजनों पर श्रद्धालु अपनी सुध-बुध खो बैठे। गर्भगृह के पट खुलते ही सजीले और अलौकिक रूप में विराजमान कनक बिहारी सरकार के दर्शन कर हर भक्त भावविभोर हो उठा।
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रामजन्मोत्सव के इस पावन अवसर पर अयोध्या के प्रमुख मंदिरों मणिरामदास की छावनी, रामबल्लभाकुंज, सियाराम किला, श्रीराम बल्लभाकुंज, जानकीघाट, आचारी मंदिर और अन्य स्थानों में भी उल्लास अपने चरम पर रहा। घंटे-घड़ियालों की गूंज, पटाखों की आतिशबाजी और उड़ते अबीर-गुलाल ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। नाका हनुमानगढ़ी में भी ठीक 12 बजे जन्म आरती हुई और हनुमंतलला को केला व लड्डुओं का भोग लगाकर प्रसाद वितरित किया गया।

सरयू तट पर बहती रही आस्था की अविरल धारा

रामजन्मोत्सव पर श्रद्धालुओं का सैलाब केवल मंदिरों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि पावन सरयू नदी के घाटों पर भी आस्था का जनसागर उमड़ पड़ा। ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचने लगे थे। हर कोई पहले सरयू में डुबकी लगाकर स्वयं को पवित्र कर लेना चाहता था। स्नान के बाद श्रद्धालु नागेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद लेते नजर आए। घाटों पर ऐसी भीड़ थी कि तिल रखने की जगह नहीं थी, फिर भी हर चेहरे पर राम के जन्मोत्सव में शामिल होने का संतोष, उस दिव्यता को महसूस करने का संतोष था।
रंग महल में राजसी भव्यता से मना जन्मोत्सव
- राम मंदिर से सटे रंग महल में रामलला का जन्मोत्सव राजसी भव्यता के साथ मनाया गया। यहां जन्मोत्सव का साक्षी बनने के लिए कई न्यायिक व प्रशासनिक हस्तियां मौजूद रहीं। महंत रामशरण दास की अध्यक्षता में दोपहर ठीक 12 बजे जन्म की आरती उतारी गई। इस दौरान मौजूद हजारों भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया। इसी के साथ मंदिर में संचालित नौ दिवसीय अनुष्ठान की भी पूर्णाहुति हुई।
नौ दिवसीय तुलसी सहस्त्रार्चन की पूर्णाहुति
प्राचीन पीठ आचारी मंदिर में नौ दिवसीय तुलसी सहस्त्रार्चन अनुष्ठान की भी पूर्णाहुति हुई। मंदिर के महंत विवेक आचारी ने बताया कि वासंतिक नवरात्र में नौ दिनों में विराजमान भगवान की रोजाना 1008 तुलसी के पत्तों से अर्चना की जाती है। सदियों की इस परंपरा का निर्वहन मंदिर में आज भी हो रहा है। बताया कि राम जन्मोत्सव पर ठीक 12 बजे भगवान की महाआरती उतारी गई। पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं को धनिया की पंजीरी प्रसाद रूप में वितरित किया गया।

34-कनकभवन में रामजन्मोस्व के मौके पर सजा भगवान का विग्रह।-संवाद

34-कनकभवन में रामजन्मोस्व के मौके पर सजा भगवान का विग्रह।-संवाद

34-कनकभवन में रामजन्मोस्व के मौके पर सजा भगवान का विग्रह।-संवाद

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