अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित भगवान मुनि सुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल हुए। सीएम ने यहां ऋषभदेव जन्मभूमि द्वार एव 101 भगवान जिनमंदिर का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अयोध्या का गौरवशाली इतिहास है। अयोध्या के राजा ज्ञान परंपरा व गोमाता, दोनों की रक्षा करते हैं। कहा कि अयोध्या भगवान ऋषभदेव की पावन भूमि भी है। वह धरती के पहले राजा हैं। अयोध्या का राजा धरती का राजा होता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान ऋषभदेव के पुत्र भरत के नाम पर ही इस देश का नाम भारत पड़ा। उन्होंने जैन दर्शन को करुणा, अहिंसा और आत्मानुशासन की महान परंपरा बताते हुए कहा कि जीओ और जीने दो का संदेश आज भी विश्व मानवता के लिए उतना ही प्रासंगिक है, जितना हजारों वर्ष पूर्व था। उन्होंने गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वे जैन दर्शन और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने का कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या केवल श्रीराम की जन्मभूमि ही नहीं, बल्कि पांच जैन तीर्थंकरों की भी जन्मस्थली है। कुशीनगर में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने अंतिम उपदेश देकर उस धरती को पवित्र नगरी के रूप में आशीर्वाद दिया था। बीच के कालखंड में लोगों ने उसे फाजिलनगर कर दिया था, अभी हाल में ही मैंने कहा कि वह पावागढ़ है, उसका नाम वही होगा।
इस अवसर पर गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माताजी ने अपने आशीर्वचन में अयोध्या की आध्यात्मिक महिमा का वर्णन किया और मुख्यमंत्री को श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर जीवन प्रकाश जैन ने किया। कार्यक्रम में आर्यिका चंदनामती माता, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, अमर चंद जैन, प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन, पुष्यदंत जैन, कैलाश चंद जैन सहित अन्य मौजूद रहे।
पंच कल्याणक महोत्सव में उमड़े देश भर से श्रद्धालु
- जैन मंदिर के पीठाधीश्वर रवींद्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि 17 से 21 जून तक चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में देशभर से लगभग दो हजार श्रद्धालु भाग लेने पहुंचे हैं। श्रद्धा, साधना और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत इस आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि अयोध्या केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि विविध धार्मिक परंपराओं के समन्वय और भारतीय संस्कृति की विराटता का जीवंत प्रतीक है।