अयोध्या। जैन मंदिर रायगंंज बुधवार को आस्था, उल्लास और अध्यात्म का संगम बन गया। गणिनी प्रमुख ज्ञानमती के जन्मोत्सव समारोह का भव्य समापन हुआ। इससे पहले भगवान ऋषभदेव व भगवान पार्श्वनाथ का 108 कलशों से मस्तकाभिषेक हुआ। वैदिक मंगल ध्वनियों और शंखनाद के बीच जब शुद्ध जल, दुग्ध आदि से भगवान का अभिषेक आरंभ हुआ तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
इससे पहले गणिनीप्रमुख का 74वां आर्यिका दीक्षा दिवस हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया। उन्होंने 74 वर्ष पूर्व राजस्थान के माधोराजपुरा (जयपुर) ग्राम में आर्यिका दीक्षा आचार्य वीरसागर महाराज से प्राप्त की थी। वह बाल ब्रह्मचारिणी कन्या के रूप में दीक्षा प्राप्त करने वाली प्रथम आर्यिका थीं। वहीं
मंदिर में विराजमान भगवान ऋषभदेव की मूर्ति का दूध व जल से मस्तकाभिषेक किया गया। इस अवसर पर जैन धर्म के 23 वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का गर्भकल्याणक भी मनाया गया। 108 कलशों से भगवान पार्श्वनाथ का अभिषेक हुआ। भगवान ऋषभदेव व भगवान पार्श्वनाथ को 74 फलों से सज्जित थाल के माध्यम से अर्घ्य चढ़ाया गया।
जन्मोत्सव के अवसर पर संजीव जैन-लखनऊ, अमरचंद जैन-लखनऊ, अमित जैन, नीरू जैन-दिल्ली समेत अन्य भक्तों ने गणिनी प्रमुख को विभिन्न उपहार दिया। बुधवार की सुबह जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी के निर्देशन में इंद्रध्वज मंडल विधान यानी ध्वजारोहण किया गया। बाराबंकी से आए पद्मावती महिला मंडल की कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सभी केा मंत्रमुग्ध कर दिया। संचालन पंडित विजय जैन ने किया। कार्यक्रम में आर्यिका चंदनामती समेत दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, बंगाल, आसाम आदि क्षेत्रों से श्रद्धालु आए थे।
सदैव अयोध्या में होते हैं तीर्थंकर भगवंतों के जन्म
गणिनीप्रमुख ज्ञानमती ने इस अवसर पर कहा कि अयोध्या परम पवित्र स्थान है। यहां पर करोड़ों-करोड़ों वर्ष पूर्व भगवान ऋषभदेव ने जन्म लिया।भगवान ऋषभदेव भगवान श्रीराम के पूर्वज थे, जिनका जन्म इक्ष्वाकुवंश में हुआ था। उससे पूर्व अनंतानंत चौबीसी के तीर्थंकर भगवंतों का जन्म इसी स्थान पर हुआ है। जैन शास्त्रों के अनुसार तीर्थंकर भगवंतों के जन्म सदैव अयोध्या में होते हैं। अयोध्या पांच तीर्थंकरों की जन्मभूमि है। यहां 18 कल्याणक (शुभ घटनाएं) घटित हुई हैं।
02- जैन मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करतीं महिला कलाकारों की टीम- मंदिर समिति