अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय के स्वामी विवेकानंद सभागार में सोमवार को डॉ. राममनोहर लोहिया जयंती समारोह के अवसर पर डॉ. लोहिया के विचारों की प्रासंगिकता विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जयप्रकाश नारायण विश्वविद्यालय, छपरा (बिहार) के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह रहे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि डॉ. लोहिया ने समाज में व्यापक परिवर्तन के लिए सप्तक्रांति का आह्वान किया था और शासन व्यवस्था के चार स्तंभ गांव, मंडल, प्रांत और केंद्र की कल्पना की थी। उन्होंने कहा कि डॉ. लोहिया का ग्रामीण विकास मॉडल गांव की आत्मनिर्भरता और मानवीय गरिमा पर आधारित था। वह चाहते थे कि आधुनिकता गांवों तक पहुंचे, लेकिन ग्रामीण संस्कृति और रोजगार प्रभावित न हों।
मुख्य अतिथि प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा को समझने के लिए पद नहीं, पदयात्रा जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता राष्ट्र प्रेम से बनती है और आज के समय में स्वतंत्रता के मूल्यों को समझने की आवश्यकता है। उन्होंने हिमालय संरक्षण, भारतीय ज्ञान परंपरा और सप्तक्रांति के विचारों को आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया।
कार्यक्रम में शहीद दिवस के अवसर पर भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को भी भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर छात्राओं ने राष्ट्रगीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. नीलम पाठक ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डीन कला संकाय प्रो. मृदुला मिश्रा ने दिया। कार्यक्रम में शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।