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Ayodhya News: वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी समेत छह को आजीवन कारावास

Tue, 04 Jun 2024 05:15 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। 24 साल पहले साहबगंज क्षेत्र में दुकान के सामने पान-मसाला थूकने को लेकर हुए विवाद के बाद हत्या में कलेक्ट्रेट में तैनात वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी समेत छह अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही 5,76,000 रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। यह आदेश सोमवार को विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट मोहिंदर कुमार ने अभियुक्तों को जेल से तलब कर भरी अदालत में सुनाया।
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कोर्ट ने जुर्माने की 80 फीसदी धनराशि 4,60,000 रुपये वादी श्याम सुंदर को दिए जाने का आदेश दिया है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, घटना नगर कोतवाली क्षेत्र की 25 अप्रैल 2000 की रात 8:15 बजे की है। शाहगंज मोहल्ला निवासी श्याम सुंदर गुप्त के भतीजे विश्वनाथ और इधर से गुजर रहे गगन उर्फ गोगा के बीच पान-मसाला खाकर दुकान के सामने थूकने को लेकर विवाद हो गया। गोगा ने यह बात अपने घर जाकर बताई। इसके बाद राठ हवेली निवासी शिवनरायण तिवारी के पुत्र श्रीकृष्ण तिवारी उर्फ छोटकन, रामकृष्ण तिवारी उर्फ बड़कन व हरिकृष्ण तिवारी उर्फ राजन व कश्मीरी मोहल्ला निवासी गगन श्रीवास्तव उर्फ गोगा अपने साथियों के साथ हथियार से लैस होकर आ गए। श्याम सुंदर अपने परिवार के साथ परचून की दुकान पर बैठे थे।
सभी लोगों ने तमंचे व बंदूक से ताबड़तोड़ फायरिंग करना शुरू कर दिया। फैजाबाद-अयोध्या मार्ग पर भगदड़ मच गई। रामकृष्ण की फायरिंग से अयोध्या कुमार गुप्त घायल हो गए। श्रीकृष्ण के फायर करने से विजय को गोली लग गई, जिससे वह जमीन पर गिर गए। दोनों लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने विजय को मृत घोषित कर दिया, जबकि अयोध्या प्रसाद का कई दिनों तक इलाज चला।
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श्याम सुंदर की तहरीर पर थाना कोतवाली नगर में 26 अप्रैल को चार नामजद सहित कई अन्य अज्ञात लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना के दौरान कश्मीरी मोहल्ला के साजिद उर्फ साबिर व शोलापुरी कॉलोनी के अजय द्विवेदी का नाम प्रकाश में आया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष से 12 गवाह पेश किए गए। न्यायाधीश ने पत्रावली पर मौजूद सबूत व गवाहों के बयान के आधार पर सभी अभियुक्तों को दोषी करार दिया। घटना की गंभीरता व अपराध को विरलतम मानते हुए सभी अभियुक्तों को हत्या, हत्या के प्रयास व गैंगस्टर एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

भगवान के घर देर है अंधेर नहीं

न्यायालय में सजा सुनाए जाने के समय मृतक विजय कुमार के पिता श्याम सुंदर भी कोर्ट में मौजूद रहे। सजा सुनते ही उनकी आंखों में आंसू आ गए और भगवान को धन्यवाद देते हुए कहा, आपके घर देर है, अंधेर नहीं। बोले- न्यायालय से आरोपियों को सुनाई गई सजा से वे संतुष्ट हैं। भावुक होकर कहा, पुत्र बेकसूर था। 17 वर्ष की अवस्था में उसकी हत्या हो गई। काफी होनहार था, उनकी जिंदगी का वही सहारा था।
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