अयोध्या। बसपा सरकार में मंत्री रहे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंदसेन यादव के कब्जे वाली करीब छह बीघा जमीन को प्रशासन ने राजकीय संपत्ति घोषित कर दिया है। इतना ही नहीं पूर्व सांसद मित्रसेन यादव की ओर से स्थापित किसान विद्यालय इंटर कॉलेज के नाम दर्ज इस जमीन की प्रविष्टि को भी रद्द कर फिर से सरकारी खाते में दर्ज कर दिया गया है।
पहले पूर्व सांसद मित्रसेन और अब पूर्व मंत्री आनंदसेन का यह किसान कॉलेज कल्यानपुर अछोरा में है। इस कॉलेज के नाम छह बीघा जमीन दर्ज करा ली गई थी। आरोप है कि यह सरकारी जमीन है और इसे कॉलेज के नाम से दर्ज कराने में फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया। असल में यह जमीन श्रेणी एक की राजकीय भूमि के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी। इसे फर्जी प्रविष्टि के माध्यम से किसान कॉलेज के नाम दर्ज करा लिया गया।
इस संबंध में चकबंदी अधिकारी ने उप संचालक चकबंदी (डीडीसी) को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इसमें कहा गया कि संबंधित भूखंड बंदोबस्त रिकॉर्ड में राजकीय भूमि के तौर पर दर्ज है। इसके बाद वर्ष 2019 से डीडीसी की ओर से पूर्व मंत्री आनंदसेन को कई बार नोटिस भेजा गया। हर बार उनसे कहा गया कि वह कॉलेज की जमीन के दस्तावेज पेश करते हुए इस संबंध में अपना पक्ष रखें। उप संचालक चकबंदी के दफ्तर का कहना है कि उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा।
वर्ष 2024 में डीडीसी की ओर से एक बार फिर जारी नोटिस को पूर्व मंत्री ने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चुनौती दी। हाईकोर्ट की ओर से डीडीसी को निर्देश दिया गया कि एक सप्ताह में अदालत में अपना जवाब दाखिल करें। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में डीडीसी ने इस भूमि को राजकीय संपत्ति घोषित कर दिया। इस संबंध में अब रिटायर हो चुके तत्कालीन डीडीसी सोमनाथ मिश्र ने अमर उजाला को बताया कि कोर्ट के आदेश के अनुसार डीएम से अनुमति लेकर साक्ष्यों के अनुसार कार्रवाई की गई।
इस बारे में पूर्व मंत्री आनंदसेन ने बताया कि इस मामले में विधिक पैरवी उनके कॉलेज के प्राचार्य और शिक्षकों की ओर से की जा रही है। वही इस बारे में तथ्यात्मक जानकारी दे सकते हैं। आनंदसेन के प्रतिनिधि के रूप में विधिक कार्य देख रहे किसान कॉलेज के प्रवक्ता राम सिंह ने बताया कि डीडीसी ने सही निर्णय नहीं किया है। राजकीय संपत्ति बताई जा रही जमीन कॉलेज के फार्म की है। यह कॉलेज स्ववित्त पोषित नहीं बल्कि एडेड है। ऐसे में स्पष्ट है कि कॉलेज आर्थिक मुनाफा नहीं कमा रहा है। इसी सप्ताह हाईकोर्ट में अपील दाखिल कर डीडीसी के आदेश को चुनौती दी जाएगी।