अयोध्या। नौकरी से निकाले जाने के बाद विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे बिजली संविदा कर्मियों के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा भी उतर गया है। राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर मंगलवार को संगठन के पदाधिकारियों ने बीकापुर तहसील में प्रदर्शन करके मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा।
धरने में संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक मायाराम वर्मा ने कहा कि प्रदेश में बिजली पहले से ही काफी महंगी है, ऊपर से 45% मूल्य वृद्धि करना आमजन के साथ धोखा है। सरकार बिजली का निजीकरण करने के लिए बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को अनसुना कर रही है। निजी कंपनियां मुनाफा कमाने के लिए बिजली मूल्य लगातार बढ़ा रही हैं। बिजली विकास का आधार है। बिना बिजली के कोई रह नहीं सकता। सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी को बिजली सुलभ कराए। सरकारी विभागों और बड़े-बड़े उपभोक्ताओं पर 72 हजार करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। ज्ञापन में दक्षिणांचल और पूर्वांचल निगमों का फैसला वापस लेने, स्मार्ट मीटर और बिजली का मूल्य ईंधन से जोड़ने का फैसला वापस और मूल्य वृद्धि का प्रस्ताव वापस लेने, किसानों को नलकूपों के लिए कम से कम 18 घंटे, ग्रामीण क्षेत्र में 20 घंटे, शहरी क्षेत्र में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने समेत अन्य मांग की गई। धरने में किसान नेता अशोक यादव, भाकपा (माले) जिला प्रभारी अतीक अहमद, भाकियू नेता कमला प्रसाद बागी, किसान सभा के जिलाध्यक्ष शेख मो. इशहाक, राम प्रकाश तिवारी, बाबूराम यादव मौजूद रहे।
वहीं, विद्युत मजदूर पंचायत के प्रांतीय उप मंत्री रघुवंश मिश्रा ने बताया कि मुख्य अभियंता वितरण के कार्यालय परिसर में मंगलवार को 64वें दिन धरना-प्रदर्शन हुआ। इस दौरान पदाधिकारियों ने आंदोलन को विस्तार देने की तैयारी है। इसे लेकर 30 जून की सुबह जिले के सभी कर्मचारियों की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।