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Ayodhya News: हर दीप में राम की स्मृति, हर रोशनी में अयोध्या का नया स्वरूप

Thu, 05 Nov 2026 11:56 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। रामनगरी में दीपोत्सव महज रोशनी का उत्सव नहीं, बल्कि सदियों पुरानी स्मृतियों को सहेजने और परंपराओं को जीवंत रखने का माध्यम भी है। यहां जलने वाला हर दीप त्रेता में भगवान राम के अयोध्या लौटने की स्मृति को ताजा करता है तो बदलती अयोध्या के नए सपनों को भी रोशन करता है। सरयू तट पर सजने वाली दीपों की कतारें अतीत और वर्तमान के बीच ऐसा सेतु बनाती हैं, जिसमें आस्था, संस्कृति और अयोध्या की बदलती पहचान एक साथ दिखाई देती है।
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वर्ष 2017 में शुरू हुआ दीपोत्सव इस बार अपने दसवें पड़ाव पर है। एक दशक में इस आयोजन ने लंबा सफर तय किया है। कभी घरों और मंदिरों तक सीमित दीप जलाने की परंपरा अब सरयू के घाटों से लेकर रामनगरी के प्रमुख मार्गों तक सामूहिक उत्सव का रूप ले चुकी है। हर वर्ष आयोजन का दायरा और भव्यता बढ़ी है, लेकिन इसकी मूल भावना आज भी मिट्टी के छोटे से दीप में ही समाई है।
हजारों हाथों की मेहनत से निखरती है उत्सव की छटा
दीपोत्सव की खूबसूरती केवल दीपों की संख्या में नहीं, बल्कि उन हजारों हाथों की मेहनत में भी छिपी है, जो इस रोशनी को आकार देते हैं। कोई दीप सजाता है तो कोई उनमें तेल भरता और बाती रखता है। शाम होते-होते अलग-अलग हाथों से सजे दीप सामूहिक उजाले में बदल जाते हैं। यही सहभागिता इस आयोजन को विशिष्ट बनाती है। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, देश-विदेश के कलाकारों की भागीदारी और आकाश में रामायण के प्रसंगों को जीवंत करती आधुनिक तकनीक दीपोत्सव को हर साल नया विस्तार दे रही है।
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जीवंत होती है भगवान राम के लौटने की स्मृति
रामकथा में वनवास पूरा होने के बाद भगवान राम की अयोध्या वापसी का प्रसंग विशेष महत्व रखता है। लोकमान्यता है कि उनके स्वागत में नगरवासियों ने दीप जलाकर पूरी अयोध्या को रोशन किया था। इस तरह दीपोत्सव परंपरा को सहेजने के साथ नई पीढ़ी को अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम भी बन रहा है।
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