अयोध्या। जिले में कोरोना से जंग के लिए संसाधन तो पर्याप्त हैं, लेकिन विशेषज्ञों की भारी कमी है। भविष्य में यदि कोरोना का प्रकोप बढ़ा तो इसके दुष्परिणाम झेलने पड़ेंगे। गंभीर रोगियों को इस बार भी जिला स्तर पर इलाज मिल पाना संभव नहीं होगा। हालांकि, अब तक की स्थिति देखकर ऐसी आशंका कम जताई जा रही है।
जिले में पर्याप्त मात्रा में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, ऑक्सीजन युक्त बेड आदि तो उपलब्ध हैं, लेकिन इन्हें चलाने वालों का अकाल है। सिर्फ सीएमओ के अधीन निश्चेतक के 14 पद रिक्त हैं। वहीं, फिजीशियन के स्वीकृत 15 पदों के सापेक्ष सिर्फ तीन की तैनाती है। इसी तरह बाल रोग विशेषज्ञ के सात, रेडियालॉजिस्ट के सभी 15, जनरल सर्जन के 14, स्त्री रोग विशेषज्ञ के 11 समेत अन्य महत्वपूर्ण पद लंबे अरसे से रिक्त हैं।
सबसे ज्यादा दिक्कत आईसीयू संचालन में होती है। इसके लिए तीन शिफ्ट में एक-एक फिजीशियन, निश्चेतक के अलावा विशेषज्ञ पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत होती है। ये कोरम सिर्फ मेडिकल कॉलेज में ही पूरा है। वहां भी मुश्किल से 20 बेड का आईसीयू चलाया जा सकता है, जो कि सामान्य दिनों में ही मरीजों से खचाखच भरा रहता है। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में मिले आईसीयू बेड और वेंटीलेटर विशेषज्ञों के अभाव में लंबे समय से धूल फांक रहे हैं।
ऑक्सीजन प्लांट तो काफी संख्या में बने हैं, लेकिन इनके संचालन के लिए भी प्रशिक्षित स्टाफ की अलग से तैनाती नहीं है। इन सबके बीच सामान्य दिनों में तो किसी तरह कार्य चलाया जा रहा है, लेकिन कोरोना का प्रकोप बढ़ने पर गंभीरता तक पहुंचे मरीजों को रेफर करना ही मजबूरी होगी।
सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बनियान ने बताया कि चिकित्सकों की कमी तो है, लेकिन इन्हीं संसाधनों के बेहतर उपयोग का प्रयास किया जाएगा। कई स्वास्थ्यकर्मियों को आईसीयू व अन्य उपकरणों के संचालन के लिए प्रशिक्षित किया गया है।