अयोध्या। एमबीबीएस के छात्र सागर पटेल के पिता समर बहादुर पटेल ने शनिवार को अमर उजाला से बात की और रूंधे गले से व्यथा सुनाई। कहा कि वह बचपन से ही सागर की हर सुख-सुविधा का ख्याल रखते थे। उसकी हर जिद पूरी करते थे। उम्मीद थी कि वह बड़े ओहदे पर जाकर उनका मान बढ़ाएगा, लेकिन उसने पूरे परिवार को निराश कर दिया।
उन्होंने बताया कि सागर तीन भाइयों में सबसे बड़ा था। बहन की शादी हो चुकी है। कड़ी मेहनत करके उन्होंने तीनों बेटों को अच्छी शिक्षा देने का प्रयास किया। वह एमबीबीएस में चयनित हुआ तो परिवार में एक आस जगी। उन्हें पैसों की ललक नहीं थी, बस बेटे काबिल निकलते तो क्षेत्र में उनका मान बढ़ता, इसी को लेकर वह हमेशा से प्रयासरत रहे। खासतौर से बड़े बेटे से उन्हें अधिक उम्मीदें थीं।
बताया कि तीन माह पहले वह घर गया था। उस दौरान महंगे मोबाइल फोन की इच्छा जताई। उन्होंने इंकार कर दिया तो अपनी मां से पैसा लेकर मोबाइल फोन खरीदा था। बीते दिनों नई बाइक की मांग की तो उन्होंने ठंडी तक दिलाने का वादा किया। वह नहीं माना तो कुछ दिन पहले बाइक खरीदी। कागजात दुरुस्त करवाकर शनिवार को बाइक हैंडओवर करने की योजना थी, लेकिन इसके पहले ही यह घटना हो गई।
समर बहादुर ने बताया कि काफी पहले सागर को सिर दर्द की समस्या थी। लगभग पांच साल पहले इलाहाबाद में डॉ. अनुराग वर्मा से उसका इलाज चला था। इन दिनों वह फिर से सिर दर्द होने की समस्या बता रहा था। एसजीपीजीआई में आकर इलाज कराने के लिए उन्होंने कहा था, लेकिन वह पढ़ाई की वजह से टालमटोल करता रहा। शंकरगढ़ बाजार में एक निजी चिकित्सक के मानसिक रोग से संबंधित इलाज कराने की उन्हें जानकारी नहीं थी।
प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा ने बताया कि घटना के बाद जब मृतक का कमरा खोला गया तो एक बेड खड़ा था। इससे पता चला कि वह कमरे में अकेले सोता था। उसके दूसरे सहपाठी से जानकारी की गई तो उसने बताया कि दोनों के सोने का समय अलग-अलग होने से वह इन दिनों बगल के कक्ष में सोता था।