2004 में हुई थी शुरुआत
अनवरत रामलीला की शुरुआत वर्ष 2004 में हुई थी। अगस्त 2015 में तत्कालीन सपा सरकार में बजट के अभाव में रामलीला का मंचन बंद हो गया। करीब पौने दो साल तक मंचन बंद रहा। 2017 में प्रदेश में जब योगी आदित्यनाथ की सरकार आई तो मंचन शुरू किया गया। रामलीला का मंचन जिस तुलसी स्मारक भवन में होता है, वह अब पहले से अधिक सुसज्जित और संसाधन युक्त हो गया है।
अवध आदर्श रामलीला मंडली के अध्यक्ष महंत मनीष दास का कहना है कि यह फैसला नई पीढ़ी के कलाकारों को रामलीला से जोड़ने में मील का पत्थर साबित होगा। बढ़ा हुआ मानदेय और बजट हमें अपनी कला को निखारने का अवसर देगा। अब मंचन और अधिक भव्य, आधुनिक और प्रभावशाली रूप में हो सकेगा।
सालाना 26 मंडलियों का होता है चयन
अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि रामलीला मंचन के लिए सालाना 26 रामलीला मंडलियों का चयन किया जाता है। हर माह के लिए दो रामलीला मंडली चयनित होती है, जो 15-15 दिन रामलीला का मंचन करती है। ऐसे में 12 महीने में 24 टीमें रामलीला मंचन करती हैं, दो अतिरिक्त टीमों का भी चयन किया जाता है।
परंपरा का सम्मान
अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि 6 अनवरत रामलीला मंचन के लिए सरकार ने बजट दोगुना कर परंपरा का सम्मान किया है। कलाकारों को अब दोगुना मानदेय दिया जा रहा है। उनके आवास की व्यवस्था बेहतर हुई है। भोजन का बजट करीब तीन गुना बढ़ा दिया गया है। अयोध्या की रामलीला अब और भव्य, सशक्त और प्रभावशाली रूप में रामकथा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएगी।