अयोध्या। मेडिकल कॉलेज के बायोकेमेस्ट्री विभाग की जांच सेवाओं को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्राचार्य के रीजेंट्स की उपलब्धता और जांच सेवाओं के संचालन को लेकर किए गए दावों पर अब विभागाध्यक्ष ने पलटवार किया है। उन्होंने प्राचार्य को पत्र लिखकर अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोप तथ्यहीन, दुर्भावनापूर्ण और वास्तविक परिस्थितियों से परे बताया है।
पत्र में उन्होंने बताया कि फरवरी 2026 से ही अनेक जांच रीजेंट्स के अभाव में बंद थीं। इसके संबंध में कई बार पत्राचार किया गया। व्यक्तिगत रूप से मिलने की कोशिश की, लेकिन प्राचार्य ने अवसर नहीं दिया। समाचार पत्रों में खबर छपने पर 28 फरवरी को बिना क्रय प्रक्रिया पूरी किए ही आपूर्ति कंपनी के माध्यम से किट उपलब्ध कराई, लेकिन इसकी जानकारी विभाग के किसी संकाय सदस्य को नहीं दी गई।
कहा कि जिन रीजेंट्स की उपलब्धता की बात कही जा रही है, उनसे संबंधित मशीनें खराब थीं। उपलब्ध रीजेंट्स के लिए आवश्यक कंट्रोल और कैलिब्रेटर उपलब्ध नहीं थे, जिसकी सूचना भी दी गई थी। उन्होंने विभागीय और मरीज हितों की अपेक्षा किसी निजी कंपनी को लाभ पहुंचाने की मंशा से समस्याओं का समयबद्ध समाधान न करने का आरोप लगाया।
बताया कि छह मई को भेजे गए पत्र में पीओसीटी कंपनी के एलआईएस इंटीग्रेशन न होने की बात कही गई, यह कथन भी निराधार है। उन्होंने पीओसीटी की आई डोज की प्रक्रिया कराने का अनुरोध किया था, क्योंकि यह प्रणाली शासनादेश के अनुसार थी। जबकि सरल सॉफ्टवेयर शासन की ओर से अनुमोदित नहीं है। इसके लिए लिखित अनुमति मांगी गई थी, लेकिन निस्तारण के बजाय तथ्यहीन आरोप लगाए जा रहे हैं।
आरोप लगाया कि विभागीय समस्याओं के समाधान के बजाय उन्हें व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया जा रहा है। इससे न केवल विभागीय कार्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि मरीजों की जांच सेवाएं भी बाधित हो रही हैं। उन्होंने प्राचार्य से मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सामने लाने और विभागीय कार्य में अनावश्यक हस्तक्षेप रोकने की मांग की है।