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Ayodhya News: चिकित्सकों के आधे पद खाली, मरीजों की सेहत से खिलवाड़

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जिला अस्पताल के मेडिसिन ओपीडी का बंद कक्ष व बैठे मरज तथा तीमारदार।-संवाद
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अयोध्या। संक्रामक रोगों के कहर के बीच जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी मरीजों की सेहत पर भारी पड़ रही है। स्वीकृत पदों की तुलना में अब आधे चिकित्सक ही यहां बचे हैं। समस्या इतनी बढ़ गई है कि बाल रोग विशेषज्ञ व ईएमओ तक से फिजिशियन का कार्य लिया जा रहा है, जिससे इलाज की गुणवत्ता भी प्रभावित होने का खतरा है।
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212 बेड के जिला अस्पताल में इन दिनों उल्टी-दस्त, बुखार के मरीजों की भरमार है। ओपीडी भी इन्हीं मरीजों से खचाखच भरी है। इस बीच यहां चिकित्सकों का अकाल हो गया है। यहां अलग-अलग विभाग में चिकित्सकों के स्वीकृत 46 पदों के सापेक्ष महज 22 की ही तैनाती है।

दो माह के भीतर एक फिजिशियन, एक चेस्ट फिजिशियन, एक आर्थो सर्जन ने इस्तीफा दे दिया है। वहीं, एक अन्य आर्थो सर्जन प्रोन्नत होने के बाद स्थानांतरित हो गए। अन्य विभागों में तो किसी तरह कार्य चल रहा है, लेकिन मेडिसिन विभाग में सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं।
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इस समय यहां फिजिशियन, चेस्ट फिजिशियन के दो-दो पद रिक्त हैं। इसके अलावा अतिविशिष्ट चिकित्सकों के पांच, बाल रोग विशेषज्ञ, जनरल सर्जन, अस्थि रोग विशेषज्ञ के एक-एक, रेडियोलॉजिस्ट, ब्लडबैंक चिकित्साधिकारी, कार्डियोलॉजिस्ट व निश्चेतक के दो-दो और ईएमओ के चार पद खाली हैं। आर्थो सर्जन के इमरजेंसी ड्यूटी व ओटी में होने से कभी-कभी तो ओपीडी सेवाएं भी बाधित होने लगती हैं।


एकमात्र स्थायी फिजिशियन बचने से आ रही बाधा

जिला अस्पताल में एकमात्र स्थायी फिजिशियन के रूप में डॉ. प्रशांत द्विवेदी ही बचे हैं। उनके अलावा प्रतिनियुक्ति पर आए डॉ. नानक सरन तैनात हैं। डॉ. अरुण प्रकाश श्रीवास्तव ने आकस्मिक अवकाश ले लिया है। ऐसे में मेडिसिन विभाग के मरीजों के इलाज में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बाल रोग विशेषज्ञ व ईएमओ से फिजिशियन का कॉल-डे कराया जा रहा है, लेकिन गंभीर मरीजों के जीवन के साथ इससे खिलवाड़ भी हो सकता है।



अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भारी कमी है। इन दिनों मरीजों का दबाव भी बढ़ा है। शासन व उच्चाधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया है। पत्राचार करके चिकित्सकों की मांग भी की गई है।
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-डॉ. उत्तम कुमार, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल
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