अयोध्या। दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन जैन समाज ने उत्तम आर्जव धर्म के माध्यम से अहिंसा, सरलता और विश्व शांति का संदेश दिया। रायगंज स्थित जैन मंदिर में चल रहे 11 दिवसीय आयोजन के तहत प्रवचन, इंद्रध्वज पूजन, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। शाम को 1008 दीपों से महाआरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता ने कहा कि विश्व में व्याप्त अशांति, हिंसा और असमानता का समाधान अहिंसा और धर्म की शुद्धता में निहित है। उत्तम आर्जव धर्म आत्मा की सरलता और निर्मलता की साधना है। इसमें कपट, छल और आडंबर का कोई स्थान नहीं है। मन, वचन और कर्म में एकरूपता लाकर ही आत्मिक उन्नति संभव है। आर्यिका चंदनामती माता ने कहा कि मृदुता, विनम्रता और शालीनता आर्जव धर्म के प्रमुख आधार हैं। यह व्यक्ति को सत्यनिष्ठा और ईमानदारी से जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि सरलता और प्रामाणिकता ही आर्जव धर्म का मूल स्वरूप है। उन्होंने कहा कि करुणा और मार्दव के भाव से ही समाज में स्थायी शांति स्थापित हो सकती है। उन्होंने बताया कि जैन समाज के अनुष्ठानों में विश्व शांति और सभी जीवों के कल्याण की कामना की जाती है। कार्यक्रम में संगीतज्ञ रूपेश जैन ने सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। संचालन डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने किया। पूजन कार्यक्रम प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन के निर्देशन में संपन्न हुआ।