अयोध्या। आस्था, समर्पण और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से राष्ट्रपति पद का एक विशेष और भावनात्मक जुड़ाव रहा है। राम मंदिर निर्माण के लिए जब निधि समर्पण अभियान की शुरुआत हुई, तब देश के तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पांच लाख 100 रुपये का पहला चेक देकर इस महाअभियान का शुभारंभ किया था। आज, जब मंदिर पूर्णता की ओर अग्रसर है, वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए मंदिर के दूसरे तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना कर इतिहास रचने जा रही हैं।
राम मंदिर निर्माण के लिए निधि समर्पण अभियान 15 जनवरी 2021 से 27 फरवरी 2021, कुल 44 दिनों तक देशव्यापी स्तर पर चलाया गया। इस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट ने स्वैच्छिक योगदान के रूप में 2500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की। यह केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था और भागीदारी का प्रतीक बन गया। इस अभियान में समाज के हर वर्ग ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। केंद्र सरकार की ओर से प्रतीकात्मक रूप से एक रुपये का दान दिया गया, वहीं शिवसेना ने एक करोड़ रुपये का योगदान किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 11 लाख रुपये का समर्पण किया।
सबसे अधिक 18 करोड़ रुपये का योगदान प्रसिद्ध कथा वाचक मोरारी बापू की ओर से आया, जिसमें उनके भक्तों का भी सहयोग शामिल था। मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी एक लाख रुपये का चेक भेंट किया। निधि समर्पण अभियान समाप्त होने के बाद भी दान का क्रम थमा नहीं। पटना के महावीर मंदिर की ओर से पूर्व आईपीएस स्वर्गीय किशोर कुणाल की ओर से 10 करोड़ रुपये का योगदान दिया गया। वहीं, प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने पहुंचे उद्योगपति मुकेश अंबानी ने 2.51 करोड़ रुपये का समर्पण किया।
इनसेट
ठेले वालों से लेकर उद्योगपतियों तक का योगदान
- मंदिर निर्माण के लिए 10, 100 और 1000 रुपये के कूपन के माध्यम से भी दान एकत्र किया गया। इसमें ठेला चलाने वालों, रिक्शा चालकों और छोटे व्यापारियों ने भी अपनी एक दिन की कमाई समर्पित की। यह अभियान देश के हर राज्य में चलाया गया और करीब 11 करोड़ परिवारों तक पहुंच बनाई गई। विशेष बात यह रही कि 75 से अधिक ऐसे दानदाता सामने आए, जिन्होंने एक करोड़ रुपये या उससे अधिक की राशि का समर्पण किया।
वर्जन
अब यंत्र स्थापना से पूर्णता की ओर एक और कदम
- राम मंदिर जन-जन का मंदिर है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की आस्था और सहभागिता का प्रतीक है। अब जब मंदिर का निर्माण पूर्णता को प्राप्त कर रहा है, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से श्रीराम यंत्र की स्थापना इस पूरे अभियान को एक भावनात्मक और ऐतिहासिक पूर्णता प्रदान करेगी। पहले दान से लेकर यंत्र स्थापना तक का यह सफर भारत की सामूहिक श्रद्धा, समर्पण और सांस्कृतिक एकता की अद्भुत गाथा बन चुका है। - डॉ़ अनिल मिश्र, सदस्य, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट