मिल्कीपुर। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज में वर्ष 2019 से जुलाई 2025 तक की पांच वर्षों की लेखा संपरीक्षा में शोध परियोजनाओं के लिए आवंटित धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का मामला सामने आया है। ऑडिट रिपोर्ट में विश्वविद्यालय में संचालित 18 शोध परियोजनाओं में वेतन, भत्तों और अन्य मदों में किए गए खर्च को गंभीर वित्तीय अनियमितता करार दिया गया है।
उत्तर प्रदेश लेखा एवं संपरीक्षा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया है कि कई शोध परियोजनाओं में बजट का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के बजाय अन्य मदों में किया गया, जो लेखा नियमों का उल्लंघन है। ऑडिट रिपोर्ट में परियोजनाओं में हुए वेतन और भत्तों के व्यय को अनुपयोगी बताया गया है। ऑडिट आपत्तियों में धान शोध परियोजना मिर्जापुर, फाउंडेशन एवं ब्रीडर बीज परियोजना, ऑयल सीड प्रोजेक्ट, सब्जी फसल, दलहन, (क्रॉप फिजियोलॉजी), घाघराघाट, बहराइच, गाजीपुर, जूट इस्टेब्लिशमेंट स्कीम सहित कई योजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं से जुड़े प्रमुख विभागाध्यक्षों को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना गया है।
लेखा संपरीक्षा रिपोर्ट में गंभीर तथ्य सामने आया है कि संबंधित वैज्ञानिक परियोजना शोध कार्यों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज लेखा संपरीक्षकों के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके। इससे विश्वविद्यालय में हो रहे शोध कार्यों की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही नियमित रूप से विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, शोध और प्रसार कार्यों की समीक्षा करते रहे हैं। वहीं, संपरीक्षा अवधि के दौरान कुलाधिपति भी विश्वविद्यालय का भ्रमण कर विकास कार्यों का जायजा लेती रही हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह के कार्यकाल से जुड़ी शिकायतों की जांच वर्तमान में अयोध्या मंडलायुक्त की ओर से की जा रही है। वहीं विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक नीरज श्रीवास्तव पर भी धन के अपव्यय और नियमों के विरुद्ध कार्य करने के आरोपों को रुदौली के भाजपा विधायक एवं विश्वविद्यालय प्रबंधन परिषद के सदस्य रामचंद्र यादव ने कोषागार निदेशालय लखनऊ में शिकायत दर्ज कराई है।
इस संबंध में जब कृषि विश्वविद्यालय के शोध निदेशक डॉ. शम्भू प्रसाद से बात की गई तो बताया कि ऑडिट की जो भी आपत्तियां है वह निराधार है उनका जवाब 15 दिन पूर्व दिया जा चुका है।