26- विश्व मृदा दिवस पर आयोजित किसान गोष्ठी में मौजूद मुख्य वक्ता आईसीएआर-एनईएच, बारापानी, मेघाल
कुमारगंज। नगर पंचायत कुमारगंज के रामनेवाज सिंह इंटर कॉलेज में विश्व मृदा दिवस के अवसर पर आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कृषि महाविद्यालय ने “स्वस्थ शहर के लिए स्वस्थ मृदा” विषय पर किसान गोष्ठी आयोजित की। मुख्य वक्ता आईसीएआर-एनईएच, बारापानी, मेघालय के पूर्व निदेशक डॉ. वीके मिश्र ने कहा कि मिट्टी केवल हमारी खेती का आधार नहीं, बल्कि यह एक जीवित तंत्र है। इसमें करोड़ों जीव रहते हैं।
उन्होंने कहा कि मृदा हमारे जीवन, कृषि, पर्यावरण और विकास की नींव है। यदि मिट्टी स्वस्थ रहेगी तो किसान मजबूत रहेगा और राष्ट्र प्रगति करेगा। तेजी से होती उपजाऊ क्षमता में कमी, रासायनिक दवाओं का अत्यधिक उपयोग व पर्यावरणीय बदलाव मिट्टी के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे जैविक खाद, हरी खाद, फसल चक्र, अवशेष प्रबंधन और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपना कर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखें।
विशिष्ट अतिथि कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. डीके सिंह ने कहा कि बढ़ती जनसंख्या के चलते खाद्यान्न की मांग लगातार बढ़ रही है। जबकि मिट्टी की उर्वरता तेजी से घट रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा यदि हम अभी जागरूक नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। जलवायु परिवर्तन, भूमि क्षरण और रासायनिक निर्भरता मिट्टी को कमजोर कर रहे हैं। इसलिए मृदा संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। डॉ. रमेश प्रताप सिंह ने कहा कि मिट्टी का संरक्षण केवल किसानों की जिम्मेदारी नहीं बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। उन्होंने सभी किसानों को संकल्प दिलाया कि वे मृदा संरक्षण के लिए जागरूक रहेंगे और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाएंगे।
इस अवसर पर डॉ. उमेश चंद्रा, एसआर मिश्र, आरके यादव, एस सिंह, आलोक सिंह, महेंद्र सिंह, डॉ. सुशील, डॉ. रोबिन सहित विश्वविद्यालय के कई वैज्ञानिक मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों व छात्रों ने भाग लिया और विशेषज्ञों से मृदा परीक्षण, उर्वरक प्रबंधन व जैविक खेती के बारे में विस्तार से जानकारी हासिल की।