अयोध्या। राजसदन का हर आंगन बुधवार को एक बार फिर नम आंखों और भावनाओं से भीगा रहा। राम मंदिर ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र की की तेरहवीं संस्कार सभा में हर वर्ग का सैलाब उमड़ा। चारों ओर जले दीप, गमगीन चेहरों और नम आंखों के बीच हर कोई यही कह रहा था, वह सबके प्रिय थे, सबके अपने थे। तेरहवीं संस्कार सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, संत समाज, फिल्म और संगीत जगत की हस्तियां और आमजन का जनसैलाब उमड़ा।
हर वर्ग, हर समाज के लोग उनके तेरहवीं संस्कार में पहुंचे और भाव-विह्वल होकर उन्हें नमन किया। संत समाज ने भी स्मृतियों को ताजा करते हुए कहा कि राजा अयोध्या ने कठिन से कठिन समय में आंदोलनकारियों और साधु-संतों का साथ निभाया। कारसेवक आंदोलन हो या मंदिर निर्माण का संघर्ष, उन्होंने न केवल सहयोग किया, बल्कि हर कदम पर मार्गदर्शन भी दिया। साहित्यकार यतींद्र मिश्र ने भावुक होते हुए कहा कि पिता जी भले ही देह रूप में न हों, लेकिन उनकी स्मृतियां और योगदान अयोध्या की आत्मा में सदैव जीवित रहेंगे।
तेरहवीं संस्कार में महंत कमल नयन दास, महंत डॉ़ भरत दास, जगद्गुरु डॉ़ राघवाचार्य, महंत रामकुमार दास, महंत राम लखन दास, संत एमबी दास, पुजारी राजूदास, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, प्रसार भारती के चेयरमैन नवनीत सहगल, पूर्व सांसद लल्लू सिंह, पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, पूर्व विधायक इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू, अभिषेक मिश्र, राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ़ अनिल मिश्र, विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज सहित साहित्यकार, शिक्षाविद्, रंगकर्मी, व्यवसायी, अधिवक्ता व प्रशासनिक अधिकारियों की भीड़ शामिल रही।
फिल्म निर्माता निर्देशक प्रकाश झा ने कहा कि अयोध्या का इतिहास उनसे अलग नहीं किया जा सकता। वह संघर्ष और आस्था दोनों के प्रतीक थे। मैंने उनकी सादगी को नजदीक से देखा है। सचमुच वे जन-जन के राजा थे।
पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा कि उनका व्यक्तित्व अयोध्या की आत्मा था। उनके आशीर्वाद से ही इस नगरी ने अपना गौरव बनाए रखा। वह सचमुच सबके प्रिय और सबके अपने थे। उनकी कमी अयोध्या को बहुत खलेगी।