अयोध्या। श्वसन तंत्र की व्यापक समस्या से जूझ रहे ज्यादातर क्षय रोगियों में ई-कोलाई व स्यूडोमोनास नामक बैक्टीरिया कॉमन पाए गए हैं। यह जानकारी राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट विभाग में बीते वर्ष हुए एक अध्ययन से मिली है। साल भर चले इस शोध के बाद ऐसे रोगियों के इलाज में दो दवाएं अधिक कारगर बताई गई हैं।
जागरूकता के अभाव में लंबे समय तक लोग क्षय रोग की चपेट में होने के बावजूद भी बीमारी से अनजान रहते हैं। कई बार वह स्थानीय स्तर पर इलाज कराते रहते हैं, जहां एंटीबॉयोटिक व अन्य दवाओं के अनावश्यक उपयोग से उनकी हालत बिगड़ने लगती है। जब वह हायर सेंटरों पर पहुंचते हैं तो पहले से दवाओं के अनियमित उपयोग के कारण कई तरह की दवाएं उन पर असर नहीं करती हैं, जिनका उन्हें गंभीर परिणाम भुगतना पड़ता है।
ऐसे कई मामले सामने आने पर मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट विभाग में बीते वर्ष एक शोध हुआ। इसमें क्षय रोगियों में कॉमन मिलने वाले बैक्टीरिया व कारगर दवाओं की जानकारी के लिए 102 भर्ती मरीजों पर अध्ययन किया गया। मरीजों के बगलम लेकर कई चरणों में शोध प्रक्रिया पूर्ण की गई तो ज्यादातर रोगियों में एस्चेरिचिया कोलाई (ई-कोलाई) आम जीवाणु पाया गया। इसके अलावा कई रोगियों में क्लेबसिएला न्यूमोनिया और स्यूडोनोमास एरुगिनोसा भी कॉमन पाए गए। वहीं, जिन मरीजों को 72 घंटे से अधिक समय पहले एंटीबॉयोटिक दी गई थी, उन्हें अध्ययन से बाहर रखा गया था।
इस तरह लिए गए नमूने
सुबह के समय गाढ़े बलगम के नमूने चौड़े मुंह वाले पात्रों में जमा कराए गए। लार से संदूषण पाए जाने वाले नमूनों को अलग कर दिया गया। तुरंत प्रसंस्करण के लिए नमूनों को सूक्ष्मजीव विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया। मानक सूक्ष्मजीव विज्ञानी तकनीकों का उपयोग करके नमूनों का कल्चर किया गया। इसके बाद एंटीबॉयोटिक संवेदनशीलता का परीक्षण किया गया। ज्यादातर मामलों में पाया गया कि पिपरासिलिन व म्यूरोपिनम से बैक्टीरिया जल्दी मर जाते हैं।
इस टीम ने किया शोध
20 जनवरी से 30 दिसंबर, 2025 तक यह शोध कार्य हुआ। इसमें विभागाध्यक्ष व सहायक आचार्य डॉ. एसके वर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अभिषेक चंद्रा, माइक्रोबॉयलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्नेहांशु शुक्ला, जूनियर रेजीडेंट डॉ. संजीव वर्मा, डॉ. प्रवीण कुमार भारती व डॉ. सोनेलाल पटेल मेडिकल कॉलेज के डॉ. वकील अहमद शामिल रहे।
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दिनेश सिंह मर्तौलिया ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के हर विभाग में शोध कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है। टीबी एंड चेस्ट विभाग में हुए शोध से क्षय रोगियों पर कारगर दवाओं की जानकारी मिली है। इन दवाओं की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित कराने के लिए प्रयास किया जाएगा। इससे रोगियों के इलाज में भी सहूलियत मिलेगी।