अयोध्या। राम की नगरी में बारिश होने पर जल निकासी भगवान भरोसे है। इसके लिए किए गए इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। ऐसे में नगर निगम की ओर से बारिश शुरू होने से पहले शहर के नालों के सफाई अभियान पर भी सवाल उठ रहे हैं। निचले इलाकों में जलभराव के पिछले सालों जैसे ही हालात दिख रहे हैं। इसमें कोई खास बदलाव नहीं आ सका है।
सबसे पहले बात करते हैं राम मंदिर के प्रवेश द्वार से सिर्फ 200 मीटर की दूरी पर स्थित जलवानपुरा कॉलोनी की। बारिश के दौरान शहर में सबसे बदतर स्थिति इसी कॉलोनी की हो जाती है। यहां के घरों में पानी भर जाता है। सड़क पर मानो नदी बहने लगती है। आवागमन पूरी तरह से बाधित हो जाता है। ऐसे में कॉलोनी की एक हजार से अधिक की आबादी और यहां के होटलों व होम स्टे में ठहरने वाले श्रद्धालुओं को नारकीय स्थिति का सामना करना पड़ता है।
इस कॉलोनी को हर साल बारिश के दौरान होने वाले भीषण जलभराव से मुक्त कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर 35 करोड़ रुपये से अधिक लागत के पंप हाउस की सौगात दी गई। अयोध्या विकास प्राधिकरण की ओर से इसका निर्माण करवाया जा चुका है। इसने काम करना भी शुरू कर दिया है। इसके बावजूद बारिश होने पर हालात पहले जैसे ही हो जाते हैं। जल निकासी होने में काफी समय लग जाता है। ऐसे में स्थानीय निवासी और रामलला के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को दुश्वारियों का सामना करने के लिए विवश होना पड़ता है।
घरों की दूसरी मंजिल और छतों पर लेनी पड़ती है शरण
जलवानपुरा के निवासी चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव बताते हैं कि कुछ घंटों की बारिश में पूरी कॉलोनी जलमग्न हो जाती है। ग्राउंड फ्लोर के कमरों में पानी भर जाता है। ऐसे में यहां रहने वालों को अपने घरों की दूसरी मंजिल पर शिफ्ट होना पड़ता है। जिनके एक मंजिल के मकान हैं, वे छतों पर पन्नी और तिरपाल डालकर रहने के लिए मजबूर होते हैं। राहुल श्रीवास्तव कहते हैं कि पंप हाउस के निर्माण के बाद भी जलभराव के हालात पहले जैसे ही हो जाते हैं। पंप हाउस का अभी बिजली कनेक्शन भी नहीं हुआ है। जेनरेटर से इसे संचालित किया जाता है। अमित चतुर्वेदी के अनुसार कॉलोनी के ज्यादातर घरों के दरवाजों पर बारिश का पानी रोकने के लिए दरवाजों पर तीन से चार फीट ऊंची दीवार बनवाई गई है। फिर भी पानी भीतर प्रवेश कर जाता है।
जनौरा में नाला बनने के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
शहर के जनौरा क्षेत्र में रहने वाले भी बारिश के दौरान जलभराव की विभीषिका से जूझते हैं। यहां पर जल निकासी के स्थायी इंतजाम के लिए नाले का निर्माण करवाया जा रहा है। जिन इलाकों में नाला बन चुका है, वहां पर अभी भी बारिश होने पर पहले जैसी स्थिति हो जाती है। इसकी वजह बताते हुए स्थानीय निवासी भाग्य नारायण सिंह कहते हैं कि पंप के माध्यम से नाले से पानी बाईपास होते हुए तिलईया नाले में छाेड़ा जाता है। इसके चलते भारी बारिश होने पर नाला ओवरफ्लो होने लगता है और सड़क से घरों के भीतर तक जलभराव हो जाता है।
हर बार बारिश में ये मार्ग, मोहल्ले व कॉलोनी होते हैं जलमग्न
रामपथ, भक्तिपथ, श्रीराम अस्पताल परिसर, सब्जी मंडी-अशर्फी भवन मार्ग, मणिरामदास छावनी मार्ग, टेढ़ी बाजार-रामजन्मभूमि मार्ग, रामघाट चौराहा, जैन मंदिर मार्ग, अवधपुरी कॉलोनी, लक्ष्मणपुरी, नाका मकबरा, राठ हवेली, वजीरगंज, ऋषि टोला, देवकाली तिराहा, बेनीगंज मार्ग, कंधारी बाजार।
नगर निगम क्षेत्र में बारिश के दौरान जलभराव वाले इलाकों में जल निकासी के स्थायी समाधान के इंतजाम किए जा रहे हैं। पंप हाउस व नालों का निर्माण करवाया जा चुका है या फिर हो रहा है। कुछ जगहों के प्रस्ताव भी भेजे गए हैं। इन कवायद का परिणाम है कि कई जगहों पर पहले जहां कई दिनों तक पानी भरा रहता था, वहां अब कुछ घंटों में जल निकासी हो जा रही है। नगर निगम की 100 टीमें पंप के साथ मुस्तैद रहती हैं। जलभराव होते ही निकासी में जुट जाती हैं।
महंत गिरीश पति त्रिपाठी, महापौर