अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय के कंवरराम साहिब सिंधी अध्ययन केंद्र के सलाहकार ज्ञानप्रकाश टेकचंदानी सरल ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय साक्षरता-2024 की थीम आपसी समझ व शांति के लिए बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना है। इससे माध्यमिक से लेकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे सिंधी विषय के विद्यार्थी अत्यंत उत्साहित हैं। उनके लिए भाषाई रोजगार के द्वार खुल रहे हैं।
टेकचंदानी अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर सिंधी अध्ययन केंद्र से जुड़े सिंधी विद्यार्थियों के ऑनलाइन विमर्श को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत एनसीईआरटी की ओर से नवभारत साक्षरता कार्यक्रम उल्लास की कार्यशाला विश्वविद्यालय के सिंधी केंद्र में हुई। इसमें देश भर के सिंधी विद्वानों ने 15 वर्ष से अधिक के वयस्कों के लिए चार प्रकार की उल्लास प्रवेशिकाओं के निर्माण पर प्रारंभिक कार्य किया, जो अभी जारी है।
राष्ट्रीय साक्षरता प्रकोष्ठ प्रभारी उषा शर्मा ने बताया कि भारतीय संविधान में अनुसूचित सिंधी सहित 22 भाषाओं में बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान की प्रवेशिकाएं राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 की अनुशंसाओं के तहत तैयार हुई हैं। इससे 25 करोड़ से अधिक असाक्षरों को 2030 तक साक्षर बनाने की योजना पर कार्य हो रहा है। शिक्षार्थियों या स्वयंसेवी शिक्षकों के लिए ऑनलाइन मॉड्यूल व वीडियो कार्यक्रमों का भी सभी भाषाओं में कार्य होने से भाषाई रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
सिंधी केंद्र के मानद निदेशक प्रो. समीर रायजादा ने उल्लास प्रवेशिका के प्रकल्प की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय भाषाओं में आपसी समझ विकसित होगी।
विमर्श में केंद्र के पूर्व निदेशक प्रो. आरके सिंह, एनसीईआरटी के अमन गुप्त, सिद्धांत सिंह, शिक्षा सलाहकार अंजलि, एनसीपीएसएल सदस्य विश्व प्रकाश, सपना खटनानी, कपिल कुमार, दुर्गा संंगतानी, राजाराम, ज्योति मूलानी, विजेता सीतलानी, झरना लखमानी, अमन विक्रम सिंह, कुसुमलता बाखरू व सरस्वती तुलस्यानी ने शिरकत की।