अयोध्या। एक्यूपंक्चर एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी का रविवार को समापन हुआ। आखिरी दिन विशेषज्ञों ने वैज्ञानिक सत्रों के जरिये कई बीमारियों के प्रबंधन पर चर्चा की। शोधपत्र प्रस्तुतिकरण के जरिये अपने नवाचार साझा किए।
संगोष्ठी में डॉ. हीरालाल सामंता ने ग्लूकोमा पर प्रस्तुतिकरण पेश किया। उन्होंने बताया कि ग्लूकोमा साइलेंट विजन किलर के रूप में जाना जाता है। शुरुआत में इसके लक्षण नहीं दिखते हैं, लेकिन समय पर इलाज न होने गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है। उन्होंने एक्यूपंक्चर के जरिये इसके बेहतर इलाज व अच्छे परिणाम की जानकारी दी। इसका लाइव डेमो दिखाया गया।
डॉ. भास्कर ज्योति भट्टाचार्य ने केटगड थेरेपी की जानकारी दी। डॉ. भवानी प्रसाद साहू ने एक्यूट पेन (विभिन्न तरीके के तेज दर्द) पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कई तरह के दर्द की जानकारी देकर उनके प्रबंधन पर चर्चा की। साथ ही दर्द प्रबंधन के लिए एक्यूपंक्चर को बेहतर बताया। आयोजन सचिव डॉ. महेश कुमार वर्मा ने कहा कि एक्यूपंक्चर चिकित्सा पद्धति देश की प्राचीनतम पद्धति है। इसे लेकर सभी चिकित्सकों को जागरूक रहना चाहिए। इस विधि से जटिलतम समस्याओं का इलाज संभव है, जिसके दुष्प्रभाव भी नहीं हैं।
इससे पूर्व इंदौर से आईं डॉ. माधवी पटेल ने 'मैं द्रौपदी हूं' पर नाटक प्रस्तुत करके खूब वाहवाही बटोरी। योग के बारे में भी जानकारी दी गई। अंत में सभी चिकित्सकों को रामनामी व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। सूरत से आए डॉ. गोपाल शाह ने कहा कि अयोध्या की धरती पर इस तरह की संगोष्ठी का आयोजन गर्व की बात है। यहां आकर दोहरा ज्ञान मिला है, जो अमूल्य है।
इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर है एक्यूपंक्चर
इंदौर की ईएनटी सर्जन डॉ. माधवी पटेल ने बताया कि एक्यूपंक्चर चिकित्सा पद्धति इम्युनिटी बढ़ाने में कारगर है। इसके अलावा इस विधा से नाक की एलर्जी, दमा, कान में आवाज आना, चक्कर आना, चेहरे का लकवा, चेहरे की नस में दर्द होना, सर्वाइकल, गर्दन के दर्द आदि का बेहतर ढंग से इलाज होता है। इसे लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। अच्छे डॉक्टरों से अपील है कि वह इस विधा में आगे बढ़ें। सीखकर इसका प्रयोग करने पर अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
एक्यूपंक्चर को आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का रहा प्रयास
एएआई के अध्यक्ष डॉ. नीलेश पटेल ने बताया कि एक्यूपंक्चर में शरीर पर सुइयां लगाकर इलाज किया जाता है। यह पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है। इसे आधुनिक विज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे दर्द, अस्थमा, मोटापा आदि बीमारियों का इलाज करते हैं। कैंसर के पारंपरिक इलाज के साथ एक्यूपंक्चर से इलाज करने पर अच्छे परिणाम सामने आते हैं। इसी विधि से पांच हजार से अधिक मरीजों का मोटापा कम किया गया है। इसमें शरीर में चर्बी ही कम होती है। दूसरी बार वजन बढ़ने के अवसर कम होते हैं।