अयोध्या। कार्तिक पूर्णिमा स्नान मेला का समापन बुधवार को हुआ। दोपहर बाद से ही श्रद्धालुओं की घर वापसी भी शुरू हो गइ्र। सरयू में स्नान और रामलला व हनुमानगढ़ी के दर्शन के बाद जब श्रद्धालु अपने-अपने घर लौटने लगे तो रेलवे स्टेशन से लेकर बस अड्डा और बाईपास तक हर जगह उन्हें कड़ी मशक्कत का सामना करना पड़ा।
अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ रही। हर प्लेटफॉर्म पर इतनी भीड़ थी कि पैर रखने तक की जगह नहीं बची। बनारस, लखनऊ, गोरखपुर सहित उत्तर पूर्व की ओर जाने वाली हर ट्रेन में यात्रियों की भारी भीड़ थी। जीआरपी पुलिस लगातार भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या इतनी अधिक थी कि हालात काबू में नहीं आ पा रहे थे। प्लेटफॉर्म के बाहर हजारों श्रद्धालु घंटों तक बैठकर अगली ट्रेन का इंतजार करते दिखे।
बनारस जा रहे श्रद्धालु राम केवल ने बताया कि बस किसी तरह घर पहुंच जाएं, यही भगवान से प्रार्थना है। ट्रेन में बैठना तो दूर, खड़े होने की जगह तक नहीं है। कई श्रद्धालु ट्रेनों के बाथरूम के पास, दरवाजे पर और सीढ़ियों पर बैठकर सफर करने को मजबूर दिखे।
बसों में यात्रियों की ठसाठस भीड़
रेलवे स्टेशन के अलावा अयोध्या बाईपास पर भी बसों में भीड़ चरम पर थी। परिवहन निगम की बसें एक के बाद एक भरकर निकल रही थीं लेकिन जितनी बसें रवाना हो रहीं, उससे क्षमता से अधिक लोग चढ़ने की कोशिश कर रहे थे। परिवहन निगम प्रशासन ने पहले ही सभी परिचालकों को सख्त निर्देश दिए थे कि किसी बस में क्षमता से अधिक यात्री न बैठाए जाएं। बावजूद इसके यात्रियों का दबाव इतना अधिक था कि चालक और परिचालक खुद भी असहाय नजर आए।
यातायात प्रतिबंधों से नहीं पहुंच सका दूध
मेले के दौरान अयोध्या शहर में सुरक्षा और व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस ने टेढ़ी बाजार से लेकर नया घाट तक चार पहिया वाहनों पर रोक लगा दी थी। बुधवार की सुबह यह प्रतिबंध स्थानीय लोगों के लिए मुसीबत बन गया। राम मंदिर और हनुमानगढ़ी के आस-पास की दुकानों पर दूध, ब्रेड और पानी की सप्लाई ठप हो गई। दूध सप्लायर हिमांशु ने बताया हमने रात में कुछ दूध की सप्लाई कर दी थी, लेकिन सुबह पुलिस ने किसी भी वाहन को अंदर नहीं जाने दिया। यहां तक कि बाइक से भी अंदर नहीं घुसने दिया गया। शृंगार हाट सब्जी मंडी में भी दोपहर कड़ी मशक्कत के बाद ही सब्जियों की गाड़ियां पहुंच पाईं।