कार्यक्रम में मौजूद इंग्लैंड के श्रद्धालु।
अयोध्या। महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सोमवार को अमावा राम मंदिर में आदिकवि महर्षि वाल्मीकि का पूजन-अर्चन कर उन्हें नमन किया गया। मंदिर परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धालुओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर इंग्लैंड से आए श्रद्धालु विनीत खनोलकर अपनी पत्नी मृणालिनी खनोलकर और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ शामिल हुए।
अमावा राम मंदिर के पंकज कुमार ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन कर्म, साधना और दृढ़ इच्छाशक्ति की प्रेरणा देता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि व्यक्ति अपने कर्मों से जीवन को नई दिशा दे सकता है। हनुमानगढ़ी के नागा साधु आचार्य रवीशदास ने क्रौंच पक्षी के वध से संस्कृत के प्रथम श्लोक की उत्पत्ति के प्रसंग को बताया। संवाद