अयोध्या। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी पर सोमवार को जैन मंदिर रायगंज में 12वें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्यनाथ की जन्मजयन्ती एवं दीक्षाकल्याणक महोत्सव उल्लास के साथ मनाया गया। गणिनी प्रमुख ज्ञानमती एवं आर्यिका चंदनामती माता के सानिध्य में भव्य महामस्तकाभिषेक और शांतिधारा संपन्न हुई। जैसे ही भगवान का अभिषेक प्रारंभ हुआ, वातावरण नमो अरिहंताणं के मंगलगान से गूंज उठा। अभिषेक के बाद भक्तों ने अद्भुत श्रद्धाभाव प्रकट करते हुए स्वयं को ‘धनकुबेर’ मानकर भगवान पर रत्न-वृष्टि की।
मंदिर प्रांगण भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर दिखाई दिया। स्वर्ण-रजत व रत्नों की प्रतीकात्मक वर्षा के बीच भगवान का पालना झुलाया गया। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर उस दिव्य क्षण के साक्षी बने, मानो देवों की ओर से मनाया जाने वाला प्राचीन जन्मोत्सव सजीव हो उठा हो। तीर्थ के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी के मुखारविंद से शांतिधारा संपन्न हुई। जिसका सौभाग्य इंदौर से पधारी अखिल भारतीय दिगंबर जैन महिला संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्षा सुमन जैन, चित्रा जैन सहित अनेक श्रद्धालु महिलाओं को प्राप्त हुआ।
अध्यात्म-अर्पिता जैन (लखनऊ) ने इंद्र-इंद्राणी की भूमिका निभाकर कार्यक्रम को और भी आध्यात्मिक गरिमा प्रदान की। वहीं न्यूजर्सी (अमेरिका) से पधारे कमलेश भाई एवं तृप्ति बेन शाह ने भी शांतिधारा में सहभागी होकर विशेष पुण्य अर्जित किया। समारेाह में वीरकुमार जैन, प्रदीप कुमार जैन, शुभचंद जैन, रितेश जैन, डॉ. जीवन प्रकाश जैन, प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन, रूबी जैन, क्षमा जैन, निधि जैन सहित सैकड़ों श्रद्धालु शामिल रहे।
15 महीनों तक करोड़ों रत्नों की होती वर्षा
स्वामी रवींद्रकीर्ति ने कहा कि जैन परंपरा के अनुसार, यह मान्यता है कि भगवान के जन्म के समय इंद्र एवं देवों की ओर से उनकी जन्मभूमि पर 15 महीनों तक प्रतिदिन करोड़ों रत्नों की वर्षा की जाती है। उसी दिव्य प्रसंग की झलक समारोह में देखने को मिली। पूरे आयोजन का यह संदेश है कि जब भक्ति में भावना का रत्न जुड़ जाता है, तब हर भक्त स्वयं ‘धनकुबेर’ बन जाता है और जिनालय, सचमुच, देवों के अवतरण का स्थल प्रतीत होने लगता है।
15- जैन मंदिर रायगंज में आयोजित कार्यक्रम में इंद्र व इंद्राणी की भूमिका में सजे भक्त- संगठन