अयोध्या। अब समझने की जरूरत है कि वर्ष 2017 और 2019 में शानदार जीत के बाद वर्ष 2022 और फिर 2024 में ऐसा क्या हुआ कि एक के बाद एक चुनाव में भाजपा को शिकस्त मिली। अमर उजाला ने इसकी हकीकत जानने के लिए भाजपा के कैडर वोटर यानी व्यापारियों की नब्ज टटोली। एक निष्कर्ष ये निकल कर आया कि वर्ष 2020 में जब यहां विकास कार्य शुरू हुए तो सड़कों के चौड़ीकरण के दौरान बड़ी संख्या में मकान और दुकानें टूटीं। बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार छिना। व्यापारी वर्ग का आरोप है कि उन्हें मकानों और दुकानों के अधिग्रहण का उचित मुआवजा नहीं मिला। जो लोग अपनी जमीन से संबंधित कागज पेश नहीं कर सके, बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को तो मुआवजा मिला ही नहीं। चौड़ीकरण में व्यापारियों को उजाड़ना और उचित मुआवजा न देना भाजपा की हार का सबसे बड़ा कारण बना। अयोध्या के हाईप्रोफाइल बनने की वजह से यहां के आम लोगों की सुनवाई न तो भाजपा के नेताओं ने की और न ही यहां की अफसरशाही ने। धीरे धीरे करके लोगों का भाजपा से मोहभंग होता गया।
सराफा कारोबारी पंकज गुप्ता ने कहा कि व्यापारी भाजपा की रीढ़ की हड्डी माने जाते हैं, लेकिन भाजपा इन्हें नहीं साध सकी। उनकी खुद की दुकान रामपथ पर थी। वह दुकान उजड़ गई, उचित मुआवजा भी नहीं मिला। दुकान के बदले दुकान देने की बात की गई थी, वो वादा भी पूरा नहीं किया गया। अब कई गुना अधिक दाम में सब्जी मंडी रोड पर दुकान ली है।
मोबाइल व्यवसायी शक्ति गुप्ता ने कहा कि चौड़ीकरण के दौरान उजड़े व्यापारियों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया। श्रृंगारहाट बैरियर के सामने उनकी दुकान थी। चौड़ीकरण में 12 फीट की दुकान मात्र चार फीट की बची है। जो मुआवजा मिला, वह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ। नई दुकान 20 से 25 लाख रुपये देकर मिल रही है। व्यापारी इससे नाराज हैं।
व्यापारी अर्जुन पटवा ने कहा निश्चित रूप से सड़क चौड़ीकरण के नाम पर व्यापारियों के साथ अन्याय हुआ है। उनकी भी दुकान सड़क चौड़ीकरण में चल गई और मुआवजे के रूप में मात्र एक लाख रुपये मिले। यहां रोज-रोज की बंदिशों से भी व्यापारी सहित हर वर्ग के लोग परेशान हैं। परिणाम पर इसका असर जरूर पड़ा होगा।