अयोध्या। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयानों से आहत होकर व सरकार के समर्थन में मंगलवार को इस्तीफा देने वाले उपायुक्त कर प्रशांत कुमार सिंह अवकाश पर चले गए हैं। वहीं, उनके इस्तीफे पर भी असमंजस है। इसे लेकर कोई अधिकारी खुलकर तो नहीं बोल रहा है, लेकिन दिन भर कार्यालय में इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गरम रहा।
उपायुक्त कर प्रशांत सिंह ने मंगलवार को इस्तीफा दिया था। इसमें उन्होंने प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री, गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री के विरुद्ध अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य की टिप्पणी से आहत होने का दावा किया था। आरोप लगाया था कि शंकराचार्य भोले-भाले अधिकारियों को प्रलोभन देकर सरकार के विरुद्ध साजिश कर रहे हैं। वह समाज में जातिवाद का जहर घोल रहे हैं और देश व प्रदेश को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं।
पहली बार सरकार के समर्थन में किसी के इस्तीफा देने से चर्चा का माहौल बन गया। जिले से लेकर देश व प्रदेश स्तर तक वह सुर्खियों में आए। इस्तीफे के बाद मान-मनौवल का दौर भी शुरू हुआ। पुलिस और प्रशासन के कई अधिकारी उन्हें समझाने का प्रयास करने लगे। इस बीच मंगलवार की शाम को ही सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर सनसनीखेज खुलासा हुआ।
लखनऊ में निजी क्लीनिक चलाने वाले उनके सगे भाई अभिजीत सिंह ने उनकी नियुक्ति को फर्जी बताया। आरोप लगाया कि उन्होंने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के जरिये नौकरी हथियाई है, जिसकी जांच चल रही है। इस खुलासे के बाद उनकी खूब किरकिरी हुई। हालांकि, इसके बाद वह मीडिया के समक्ष नहीं आए न ही किसी तरह की बयानबाजी की। बुधवार को भी वह दफ्तर में नहीं देखे गए, लेकिन कार्यालय में दिन भर उनके नाम और प्रकरण की चर्चा रही।
अपर आयुक्त ग्रेड-1 संतोष कुमार ने बताया कि उपायुक्त कर प्रशांत सिंह अवकाश पर हैं। उनका इस्तीफा मिला है, जिसे लेकर कागजी कार्रवाई की जा रही है।