10वें दीपोत्सव में 30 लाख से अधिक दीपों को रोशन करने के लिए अवध विश्वविद्यालय ने वालंटियर जुटाने की तैयारी शुरू कर दी है। करीब 35 हजार वालंटियर इस बार दीप सजाने और प्रज्ज्वलन की व्यवस्था में लगाए जाएंगे। औसतन एक वालंटियर को 86 दीये की जिम्मेदारी दी जाएगी।
घाट और सेक्टर के हिसाब से यह संख्या कम-ज्यादा होगी। पिछले वर्ष 26,17,215 दीप प्रज्ज्वलित किए गए थे। विश्वविद्यालय से जुड़े महाविद्यालयों, इंटर कॉलेजों और दूसरे शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को वालंटियर बनाया जाएगा। इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराया जा रहा है। पंजीकरण के बाद संस्थानवार सूची तैयार होगी और इसी के आधार पर अलग-अलग घाटों पर टीमों की तैनाती की जाएगी।
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दीपोत्सव के नोडल प्रभारी एसएस मिश्रा के अनुसार, राम की पैड़ी समेत दीप प्रज्ज्वलन वाले घाटों को सेक्टर में बांटकर काम कराया जाएगा। किस सेक्टर में कितने वालंटियर रहेंगे और उन्हें कितने दीपों की जिम्मेदारी मिलेगी, यह घाटवार व्यवस्था के आधार पर तय किया जाएगा। सुरक्षा को देखते हुए छोटे बच्चों को वालंटियर नहीं बनाने की व्यवस्था रखी गई है।
2017 से बढ़ती गई दीपों की रोशनी
2017 में अयोध्या के पहले दीपोत्सव में 1,87,213 दीप जलाए गए थे। 2018 में 3,01,152, 2019 में 4,04,026, 2020 में 6,06,569, 2021 में 9,41,551 और 2022 में 15,76,955 दीप प्रज्ज्वलित हुए। 2023 में 22,23,000 और 2024 में 25 लाख से अधिक दीप जलाए गए। 2025 में 26,17,215 दीपों का आंकड़ा रहा। 2026 में करीब 30 लाख से अधिक दीपों का लक्ष्य है।