अयोध्या। सूर्य उपासना के महापर्व छठ की शुरुआत 25 अक्तूबर को नहाय-खाय से होगी। इस दौरान महिलाएं बच्चों के स्वास्थ्य, सफलता और दीर्घायु के लिए 36 घंटे उपवास करती हैं। सरयू के घाटों पर वेदी निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। घाटों पर सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सजावट का काम जोर-शोर से चल रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन ने विशेष योजना तैयार की है, जिसमें स्वास्थ्य सेवाएं, मेडिकल टीमें, एंबुलेंस और पुलिस बल की तैनाती शामिल है।
नगर निगम सरयू नदी के घाटों पर सफाई अभियान चला रहा है। घाटों को रंग-बिरंगी लाइटों से सज्जित किया जा रहा है। 25 अक्टूबर को छठ पर्व की शुरुआत होगी। इस दिन व्रती स्नान और पूजा-अर्चना के बाद सात्विक भोजन ग्रहण करेंगे। अगले तीन दिनों में खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य के अनुष्ठान होंगे। इस दौरान अयोध्या के घाटों पर हजारों श्रद्धालु सूर्य भगवान को अर्घ्य देंगे। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे घाटों की स्वच्छता बनाए रखें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें। एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर ने बताया सुरक्षा के मद्देनजर घाटों पर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। महिला पुलिस कर्मियों की भी ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा, भीड़ को कंट्रोल करने के लिए भी व्यापक स्तर पर प्लान बनाया गया है।
कठिन तप और संयम का प्रतीक है छठ पर्व
हनुमानगढ़ी के डॉक्टर देवेशाचार्य बताते हैं कि छठ महापर्व सूर्योपासना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का अनूठा पर्व है। यह पर्व न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। यह परिवार और समुदाय के बीच एकता को बढ़ावा देता है। चार दिनों तक चलने वाले यह पर्व कठिन तप और संयम का प्रतीक है। कहा कि यह पर्व पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है, क्योंकि इसमें नदियों और जलाशयों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। छठ पर्व वह सेतु है जो अयोध्या की भक्ति और मिथिला की परंपरा को जोड़ता है।