राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा प्रकरण को लेकर उठे सवालों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अपने आचरण और बयान, दोनों के माध्यम से स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया।
रामलला के दर्शन के दौरान उन्होंने स्वयं दान पात्र में चढ़ावा अर्पित किया और बाद में कहा कि चढ़ावा प्रकरण में दूध का दूध और पानी का पानी होगा। इसे मंदिर में श्रद्धालुओं के विश्वास को मजबूत करने और जांच प्रक्रिया पर भरोसा कायम रखने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
दान पात्र में श्रद्धा के साथ अर्पित किया चढ़ावा
मुख्यमंत्री ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन के दौरान दान पात्र में श्रद्धा के साथ चढ़ावा अर्पित किया। हाल के दिनों में चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और चोरी के मामले सामने आने के बाद यह उनका दूसरा अयोध्या दौरा था।
ऐसे में मुख्यमंत्री का दान पात्र में चढ़ावा अर्पित करना विशेष महत्व का माना गया। बाद में दिगंबर अखाड़े में परमहंस रामचंद्र दास की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राम जन्मभूमि चढ़ावा प्रकरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या दोष को छिपाया नहीं जाएगा।
'दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी'
उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की संस्तुति पर ही विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है और जांच पूरी निष्पक्षता से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट दोनों इस मामले को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी किया जाएगा। साथ ही श्रद्धालुओं से अपील की कि वे जांच प्रक्रिया पर विश्वास रखें और किसी प्रकार के भ्रम या अफवाह पर ध्यान न दें।
पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी
मुख्यमंत्री के इस दौरे को चढ़ावा प्रकरण के बाद श्रद्धालुओं के बीच भरोसा कायम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। एक ओर उन्होंने स्वयं दान पात्र में चढ़ावा अर्पित कर श्रद्धा व्यक्त की, वहीं दूसरी ओर स्पष्ट शब्दों में कहा कि चढ़ावे से जुड़े मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी तथा दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।