अयोध्या। अयोध्या डिपो से संचालित सैकड़ों बसें जिले के राजस्व को चूना लगा रही हैं। वजह यह है कि इन बसों का पंजीकरण अयोध्या के बजाय अन्य जिलों, विशेषकर कानपुर में हो रहा है। यही कारण है कि इनसे मिलने वाला वाहन कर अयोध्या में जमा नहीं हो पा रहा और विभाग को लगातार राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2024 की तिमाही में परिवहन विभाग को 60.85 लाख का राजस्व प्राप्त हुआ था। लेकिन वर्ष 2025 की इसी तिमाही में यह आंकड़ा घटकर 32.66 लाख रह गया। यानी विभाग को तीन महीनों में 28.19 लाख से अधिक का घाटा हुआ है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि इन बसों का पंजीकरण अयोध्या में होता, तो यहां का राजस्व लगभग दोगुना हो सकता था।
क्षेत्रीय प्रबंधक विमल राजन ने बताया कि वर्तमान में अयोध्या परिक्षेत्र में करीब 200 ऐसी नई बसें संचालित हो रही हैं जिनका पंजीकरण कानपुर में किया गया है। उन्होंने बताया कि पहले जितनी भी बसें आती थीं, उनका पंजीकरण क्षेत्रीय प्रबंधक के नाम पर होता था, जिससे कर यहीं जमा होता था। लेकिन अब जो नई बसें आ रही हैं, वे जीएम के नाम पर पंजीकृत हो रही हैं और उनका पंजीकरण कानपुर में हो रहा है। इसके चलते इन वाहनों से मिलने वाला सारा टैक्स कानपुर में ही जमा हो रहा है।