अयोध्या। भाई के फर्जी शपथ-पत्र के आधार पर मृतक आश्रित की नौकरी हथियाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने न्यायालय के आदेश पर पर्यटन विभाग में तैनात वरिष्ठ लिपिक अमरेश यादव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करके छानबीन शुरू की है।
दर्ज एफआईआर में शहर के नील गोदाम निवासी रितेश कुमार यादव ने बताया कि उनके पिता क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय में कनिष्ठ लिपिक थे। सात फरवरी, 2012 को उनकी असमय मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर उनकी सरकारी नौकरी पर उनके परिवार के अन्य लोगों के साथ ही वह भी दावेदार थे। उस समय उनके भाई अमरेश यादव ने बताया कि ''''तुम्हारे नाम पर बड़े भाई राकेश यादव को आपत्ति है।''''
उस समय उनका उनके बड़े भाई से विवाद चल रहा था। इसलिए उन्होंने अमरेश की बात पर विश्वास करके सहमति दे दी। इधर, उनका संबंध बड़े भाई से बेहतर हुआ तो उन्होंने बताया कि वह अमरेश को नौकरी मिलने के पक्ष में नहीं थे। अमरेश ने कपट व छलपूर्वक नौकरी पाने के उद्देश्य से उनके शपथ पत्र पर कूटरचित हस्ताक्षर बनाया था। हस्तलेखा विशेषज्ञ से उन्होंने उस शपथ पत्र के हस्ताक्षर की जांच करवाई थी, जिसमें हस्ताक्षर के फर्जी रूप से बनाए जाने की पुष्टि हुई है।
आरोप लगाया कि अमरेश ने परिवार में अलगाव का फायदा उठाकर सभी को धोखा देते हुए नौकरी हासिल की है। उन्होंने इस संबंध में 12 जून, 2023 को पर्यटन विभाग में शिकायती पत्र दिया था। सात जुलाई को उन्होंने इस मामले में अमरेश से बात की तो वह हमलावर हो गए और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने लगे। अगले दिन स्थानीय पुलिस को शिकायती पत्र दिया गया, लेकिन कार्रवाई न होने पर न्यायालय की शरण ली गई। नगर कोतवाल अश्विनी पांडेय ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज करके मामले की जांच की जा रही है।