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Ayodhya News: भदरसा कांड के आरोपी मोईद को कोर्ट से लगा झटका

Fri, 17 Oct 2025 08:39 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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अयोध्या। पूराकलंदर क्षेत्र में किशोरी से हुए सामूहिक दुष्कर्म के बहुचर्चित मामले में शुक्रवार को आरोपी सपा नेता मोईद अहमद को झटका लगा है। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम निरुपमा विक्रम की अदालत में जेल में निरुद्ध आरोपी मोईद की ओर से पीड़िता का बयान दर्ज करने वाली महिला मजिस्ट्रेट को तलब करने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था। न्यायाधीश ने आरोपी के अधिवक्ता व विशेष लोक अभियोजक विनोद उपाध्याय के तर्कों को सुनने के बाद मोईद अहमद का मजिस्ट्रेट को तलब करने का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया।
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न्यायालय की ओर से आरोपियों की ओर से आरोपों से बचाव के सबूत दाखिल करने के लिए 31 अक्तूबर की तिथि नियत की गई है। किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद पुलिस ने पीड़िता का बयान दर्ज किया था। पुलिस की सुरक्षा में विधिक प्रक्रिया के अनुसार पीड़िता को कलम बंद बयान के लिए मजिस्ट्रेट के सामने लाया गया, जहां पर सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता ने अपना बयान दर्ज कराया था। पीड़िता का मजिस्ट्रेट के समक्ष दो बार बयान दर्ज किया गया था। इसीलिए आरोपी मोईद की ओर से मजिस्ट्रेट को विचारण न्यायालय में उपस्थित होने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया।


घटना थाना पूराकलंदर के भदरसा क्षेत्र की है। किशोरी खेत पर काम करने गई थी। राजू खान ने बालिका से आकर कहा कि मोईद खान ने बेकरी पर काम करने के लिए बुलाया है। बेकरी पर पहुंचने के बाद मोईद खान ने दुष्कर्म किया। राजू खान ने मोईद खान की मोबाइल से मोईद की ओर से बालिका के साथ दुष्कर्म करने की रिकॉर्डिंग भी कर लिया । इसके बाद राजू ने भी बालिका के साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता की मां की तहरीर पर 29 जुलाई 2024 को थाना पूराकलंदर में राजू व मोईद के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म, जान से मारने की धमकी व पॉक्सो एक्ट की कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।
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आरोपी मोईद की उच्च न्यायालय से मंजूर हुई है जमानत


जेल में निरुद्ध आरोपी सपा नेता मोईद अहमद की जमानत अर्जी उच्च न्यायालय इलाहाबाद खंडपीठ लखनऊ से बृहस्पतिवार को स्वीकृत की गई है। मोईद अहमद की यह दूसरी जमानत याचिका थी, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर किया है। इसके पहले मोईद की प्रथम जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दिया था। मुकदमा की वादिनी व पीड़िता के बयान विचारण न्यायालय में दर्ज होने के बाद नए सिरे से जमानत अर्जी दाखिल करने की छूट दी गई थी।
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