नितिन श्रीवास्तव
अयोध्या। राम मंदिर दानपेटिका से धन की हेराफेरी के मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कैंप कार्यालय प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने हमारी टीम से बातचीत की है। उन्होंने कहा कि काउंटिंग स्टाफ का चयन और उनकी तैनाती बैंक के माध्यम से होती थी। ऐसे में पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही भी बैंक की थी। मामले में दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। साथ ही दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने गड़बड़ी की आशंका सामने आते ही तत्काल कार्रवाई शुरू की। इसी के बाद जांच आगे बढ़ी, आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और उनके पास से बड़ी मात्रा में नकदी व अन्य सामग्री बरामद हुई। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो लेकिन किसी निर्दोष को नहीं फंसाया जाना चाहिए। बताया कि दानराशि की गिनती और बैंक में जमा कराने की पूरी प्रक्रिया भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए औपचारिक अनुबंध के तहत संचालित होती थी।
शुरू में दानपेटिकाओं से निकली राशि का विवरण ट्रस्ट को उपलब्ध कराया जाता था और इसके बाद बैंक कर्मचारी राशि बैंक में जमा कराते थे। बाद में मंदिर परिसर में ही बैंक का काउंटर स्थापित किया गया, जहां बैंक की ओर से अधिकृत काउंटिंग स्टाफ दानराशि की गणना कर सीधे बैंक खाते में जमा करता था। निगरानी के लिए ट्रस्ट की ओर से सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी सुभाष चंद्र को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लापरवाही के आरोपों के चलते उन्हें भी आरोपी बनाया गया है। वहीं टिन्नू यादव का कार्य केवल मंदिर परिसर की व्यवस्थाएं देखना था।
नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चंपत और अनिल ने छोड़ा है पद
प्रकाश ने बताया कि शुरुआती जांच में गड़बड़ी का संदेह बैंक की ओर से नियुक्त आउटसोर्सिंग कर्मचारियों पर केंद्रित है। उनके अनुसार दानराशि की गिनती एक सुरक्षित कक्ष में होती थी, जहां केवल अधिकृत कर्मचारियों को ही प्रवेश मिलता था। पूरी प्रक्रिया पर ट्रस्ट के प्रतिनिधि नजर रखते थे। उन्होंने स्वीकार किया कि निगरानी व्यवस्था की कुछ कमियों का लाभ आरोपियों ने उठाया। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर उन्होंने कहा कि दोनों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा, निगरानी और दानराशि की काउंटिंग व्यवस्था को और अधिक मजबूत किया जा रहा है।