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Ayodhya News: अयोध्या की आर्थिक तरक्की का जरिया बनेगा बांस क्राॅफ्ट

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3- बांस क्राॅफ्ट से बनाया गया राम मंदिर का मॉडल- सीडीओ
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आदर्श शुक्ल
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अयोध्या। अब बांस क्राॅफ्ट अयोध्या की आर्थिक तरक्की का जरिया बनेगा। प्रशिक्षण के बाद व्यावसायिक स्तर पर पहले चरण में राम मंदिर के टूडी और थ्रीडी मॉडलों का उत्पादन शुरू कर दिया गया है। आने वाले समय में बांस से निर्मित सजावटी व व्यावहारिक वस्तुओं का भी उत्पादन शुरू करने की तैयारी है। रूरल सेल्फ एंप्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की ओर से प्रशिक्षित किए गए बांस शिल्प के हुनरमंदों में अधिकतर ग्रामीण परिवेश की महिलाएं शामिल हैं।

जिला प्रशासन ने बांस क्रॉफ्ट से बनी सजावटी और उपयोगी वस्तुओं के निर्माण की कार्ययोजना पर अमल शुरू कर दिया है। इसके तहत फर्नीचर, टोकरियां, फूलदान, रसोई के बर्तन, लैंप और विंड चाइम का निर्माण कराने की भी तैयारी है। यह पारंपरिक और पर्यावरण अनुकूल शिल्प है, जो सांस्कृतिक विरासत का भी हिस्सा है। इसे बनाने के लिए बांस को काटा, मोड़ा और बुना जाता है, जिससे मजबूत और टिकाऊ उत्पाद बनते हैं।
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राम मंदिर बनने के बाद से अयोध्या आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। यहां पर रामलला के दर्शन के लिए आने वाले देश-दुनिया के श्रद्धालु वापस जाते समय अपने साथ स्थानीय धार्मिक परिवेश से जुड़ी स्मृतियां भी लेकर जाने की भावना रखते हैं। इसे देखते हुए जिला प्रशासन ने बांस क्राॅफ्ट से सजावटी और उपयोगी वस्तुओं के निर्माण की योजना तैयार करते हुए 70 बांस क्राॅफ्ट शिल्पियों को रूरल सेल्फ एंप्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से प्रशिक्षित कराया है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से प्रशिक्षक बुलाए गए थे। प्रशिक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
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स्थानीय बाजार से जोड़ते हुए उत्पादन और बिक्री को बढ़ाने के भी प्रयास

मुख्य विकास अधिकारी कृष्ण कुमार सिंह ने अमर उजाला को बताया कि इन प्रशिक्षित बांस क्राॅफ्ट शिल्पियों में ग्रामीण महिलाओं के साथ डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के फाइन आर्ट के छात्र-छात्राएं भी शामिल हैं। इनकी ओर से बांस क्राॅफ्ट से राम मंदिर के मॉडलों को बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए मशीन और अन्य आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं। इन शिल्पियों को स्थानीय बाजार से जोड़ते हुए उत्पादन और बिक्री को बढ़ाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। इससे आजीविका का नया साधन विकसित होगा और बांस क्राफ्ट के क्षेत्र में अयोध्या की पहचान बनेगी।
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