फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ayodhya News: आयुर्वेद विशेषज्ञों ने बताए लू से बचने के पंच-सूत्र, प्राकृतिक पेय और दिनचर्या पर जोर

Sun, 26 Apr 2026 08:40 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
विज्ञापन
विज्ञापन
अयोध्या। सूर्य की तेज तपिश और लू के थपेड़ों ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। ऐसे में आयुर्वेद विशेषज्ञों ने लू (हीटस्ट्रोक) से बचाव के लिए पंचसूत्र साझा किए हैं। आयुर्वेदिक ऋतुचर्या के पालन से लोग लू (हीटस्ट्रोक) के प्रभाव से बचा सकता है। इन उपायों में प्राकृतिक पेय और सही दिनचर्या पर विशेष जोर दिया गया है।
विज्ञापन

क्षेत्रीय आयुर्वेदिक व यूनानी अधिकारी डॉ. महेंद्र सिंह विष्णु के मार्गदर्शन में आमजन को सुरक्षित रखने के लिए विशेष उपाय साझा किए गए। उन्होंने बताया कि ग्रीष्म ऋतु आदान काल होती है, जिसमे सूर्य की गर्मी शरीर के ओज और बल को कम करती है। इस दौरान पित्त बढ़ने से शरीर का जलीय अंश घटता है, जिससे लू का खतरा बढ़ता है। सिरदर्द, चक्कर आना, अत्यधिक प्यास, त्वचा का लाल व शुष्क होना, उल्टी-दस्त और तेज बुखार लू के प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे में समय रहते सावधानी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने शरीर को अंदर से ठंडा रखने और पित्त दोष को शांत करने पर जोर दिया है। उन्होंने दोपहर बारह से चार बजे तक तेज धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर ढककर निकलें और खाली पेट न जाएं। तेज बुखार, बेहोशी या भ्रम जैसे गंभीर लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल में संपर्क करें।

विशेषज्ञों ने बताया कि आम पन्ना, छाछ, सत्तू का घोल, नारियल पानी, बेल का शरबत और सौंफ धनिया का पानी शरीर को ठंडक देते हैं और डिहाइड्रेशन से बचाते हैं। चीनी की जगह मिश्री का उपयोग अधिक लाभकारी है। आहार में हल्का और सुपाच्य भोजन लेना चाहिए। खीरा, तरबूज, खरबूजा और अनार जैसे शीतल प्रकृति के फल लाभदायक हैं, जबकि तैलीय और मसालेदार भोजन से दूरी बनानी चाहिए।
विज्ञापन


विशेषज्ञों ने बताया कि नस्य क्रिया को लू से बचाव का प्रभावी उपाय है। घर से निकलने से पहले नाक में घी या अणु तेल की दो बूंद डालने से गर्म हवा का प्रभाव कम होता है। रात में पैरों के तलवों पर घी से मालिश करने से शरीर की गर्मी संतुलित रहती है। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें, मिट्टी के घड़े का पानी पिएं और शीतली-शीतकारी प्राणायाम करें। गिलोय, आंवला, चंदन और खस जैसी आयुर्वेदिक औषधियां प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ गर्मी के प्रभाव को कम करती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें