अयोध्या। रिपु रन जीति सुजस सुर गावत, सीता सहित अनुज प्रभु आवत... गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस की ये पंक्तियां शनिवार को रामनगरी में साकार होती नजर आईं। सरयू तट पर पुष्पक विमान रूपी हेलीकॉप्टर से प्रभु श्रीराम, माता सीता और अनुज लक्ष्मण का आगमन हुआ तो पूरी रामनगरी भक्ति के रंग में रंग गई। गुरु वशिष्ठ की भूमिका में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ प्रभु श्रीसीताराम के रथ की डोर थामी तो मानो राजसत्ता स्वयं परमसत्ता के चरणों में समर्पित हो गई।
सरयू तट पर पुष्पक विमान से श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, हनुमान और गुरु वशिष्ठ के स्वरूप उतरे। गुरु वशिष्ठ की भूमिका में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मंत्रिमंडल के सहयोगियों के साथ उनका माल्यार्पण कर स्वागत किया। यह दृश्य वनवास पूरा कर प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने के प्रसंग की याद दिला रहा था।
अगवानी के बाद प्रभु श्रीसीताराम रथ पर विराजमान हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनके सहयोगियों ने रथ की डोर थामी और उसे रामकथा पार्क की ओर खींचकर आगे बढ़े। इस दृश्य को देखकर महंत डॉ. भरत दास ने कहा कि परमसत्ता के रथ की डोर राजसत्ता खींच रही है। इससे अनुपम दृश्य और क्या हो सकता है।
इस दौरान आसमान से पुष्पवर्षा हुई। शंखनाद और जय श्रीराम के उद्घोष से वातावरण राममय हो उठा। रामकथा पार्क के मंच पर राम दरबार सजा तो लगा मानो त्रेतायुग का राजमहल फिर साकार हो गया हो। प्रभु श्रीराम के साथ माता सीता, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और हनुमान के स्वरूप विराजमान थे। प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों, संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को भक्ति और समर्पण के भाव से भर दिया। संतों और श्रद्धालुओं की आंखें भावुक थीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी राम दरबार के इस दृश्य को अपलक निहारते नजर आए।
उपराष्ट्रपति, सीएम, राज्यपाल व संतों ने किया राजतिलक
इसी बीच उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन रामकथा पार्क पहुंचे और प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक की प्रक्रिया शुरू हुई। रामचरितमानस की चौपाई ''प्रथम तिलक वशिष्ठ मुनि कीन्हा, पुनि सब बिप्रन्ह आयसु दीन्हा...'' मंच पर साकार होती नजर आई। सबसे पहले उपराष्ट्रपति ने प्रभु श्रीराम का राजतिलक किया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने तिलक कर आरती उतारी। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक सहित मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों और रामनगरी के प्रमुख संतों ने भी बारी-बारी से राम दरबार की आरती की।