राम मंदिर में गर्भगृह के बाहर रामलला की महाआरती की व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब 51 के बजाय नौ बातियों से रामलला की आरती की जा रही है। मंदिर की भव्यता और पत्थरों के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की आपत्ति के बाद आरती में बातियों की संख्या कम की गई है।
ट्रस्ट सूत्रों के अनुसार, मंदिर की नई धार्मिक समिति की पहल पर गर्भगृह के बाहर सरयू आरती की तर्ज पर 51 बत्ती से आरती शुरू की गई थी। आरती के दौरान बड़ी संख्या में दीप जलने से निकलने वाले धुएं और कालिख को लेकर चंपत राय ने आपत्ति जताई। उन्होंने धार्मिक समिति के अध्यक्ष एवं ट्रस्ट के महासचिव गोविंद देव गिरि के समक्ष यह विषय उठाया।
चंपत राय ने बताया कि रामलला का गर्भगृह मकराना के सफेद संगमरमर से सजा है, जबकि मंदिर के बाहरी हिस्से में वंशी पहाड़पुर के लाल पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर में पत्थरों की स्वच्छता और संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाता है। ऐसे में 51 बाती की आरती से निकलने वाली कालिख लंबे समय में पत्थरों की रंगत और चमक को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने मंदिर की स्थापत्य भव्यता का हवाला देते हुए आरती के स्वरूप पर पुनर्विचार का सुझाव दिया। इसके बाद गोविंद देव गिरि ने मामले का संज्ञान लिया और आरती की व्यवस्था में बदलाव किया गया। अब गर्भगृह के बाहर नौ बातियों से रामलला की महाआरती की जा रही है। इससे धार्मिक परंपरा का निर्वहन जारी रखने के साथ ही मंदिर के संगमरमर और लाल पत्थरों को धुएं व कालिख के संभावित प्रभाव से बचाने की कोशिश की जा रही है।
पत्थरों के संरक्षण को लेकर सतर्कता
राम मंदिर में इस्तेमाल पत्थरों और संगमरमर की चमक व गुणवत्ता बनाए रखने के लिए ट्रस्ट की ओर से विशेष सावधानी बरती जाती है। दीपोत्सव और अन्य आयोजनों के दौरान भी तेल या अन्य सामग्री पत्थरों पर न गिरे, इसका ध्यान रखा जाता है। इसी क्रम में आरती में बातियों की संख्या कम करने का निर्णय अहम माना जा रहा है।