पंचवटी में रामायण में वर्णित 88 प्रकार के दुर्लभ और औषधीय पौधे भी रोपित किए जाएंगे। जो उस युग के जैविक जीवन और जैविक विविधता को दर्शाएंगे। पीपल, बरगद, बेल, आंवला, आम जैसे वृक्षों के साथ-साथ शमी, सीता अशोक, चंपा, कदंब, पलाश, पारिजात आदि पौधे रोपित किए जाने की योजना है। सीता अशोक का पौधा श्रीलंका से आएगा। विदेश से कुछ अन्य पौधे भी आएंगे।
पंचवटी का निर्माण केवल सजावटी नहीं बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक प्रामाणिकता के साथ किया जा रहा है। इसके लिए रामायण, विशेषकर वाल्मीकि व तुलसीकृत रामायण के प्रसंगों का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि उस युग की पंचवटी का वास्तविक स्वरूप जीवंत हो सके। कार्यदायी संस्था पंचवटी के हर तत्व को त्रेतायुगीन वातावरण के अनुरूप ढालने का प्रयास करेगी। यह पंचवटी केवल एक पर्यटक स्थल नहीं बल्कि, श्रद्धा, ध्यान और साधना के लिए विशेष केंद्र बनेगी।