01- आवासीय शास्त्रीय संगीत सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि का सम्मान करते कार्यक्रम के
अयोध्या। शास्त्रीय सुरों, तालों और रागों की दिव्य अनुगूंज के बीच चार दिवसीय आवासीय शास्त्रीय संगीत सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ। रविवार की देर रात मानस भवन में दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुए इस सम्मेलन में जैसे ही प्रथम स्वर फूटा, पूरा सभागार संगीत की साधना में डूब गया। अभिजात म्यूजिक फोरम की ओर से आयोजित सम्मेलन में देश के कोने-कोने से कई नामी कलाकार पहुंचे हैं। बाबा मानस दास और तालयोगी पं. सुरेश तलवलकर ने शुभारंभ किया।
अभिजात के निदेशक मुकुंद आठवले ने अभिजात म्यूजिक फोरम और सम्मेलन के उद्देश्यों के बारे में बताया। शास्त्रीय गायिका श्रुति काटकर ने फोरम को आशीर्वाद दिया। उन्होंने अच्छे श्रोता का संगीत व्यवहार में महत्त्व बताया। बाबा मानस दास ने राग दरबारी में हनुमान जी की स्तुति का गायन किया। उद्घाटन सत्र में देश के प्रतिष्ठित कलाकारों ने रागात्मक प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। विलंबित से द्रुत की ओर बढ़ती बंदिशों, सधी हुई आलाप और सटीक तानों ने शास्त्रीय संगीत की गरिमा और गहराई को सजीव कर दिया। तबले और पखावज की संगत ने प्रस्तुतियों में तालात्मक सौंदर्य भर दिया, वहीं हारमोनियम और तानपुरे के मधुर स्वरों ने वातावरण को अलौकिक बना दिया।
कार्यक्रम के संयोजक मंडल में शामिल अनूप सिंघल ने बताया कि देश के कोने-कोने से 30 कलाकार अयोध्या पहुंचे हैं। कुल 24 सत्रों में कार्यक्रम होना है। सम्मेलन का समापन चार फरवरी को होगा। एक अन्य सदस्य केशव परांजपे के अनुसार हर सत्र को इस तरह रूपायित किया गया है कि श्रोता शास्त्रीय संगीत की सूक्ष्मताओं को नजदीक से अनुभव कर सकें।
11 वर्षीय बालक के पखावज वादन ने किया मुग्ध
कार्यक्रम का समापन 11 वर्षीय बालक के पखावज वादन से हुआ जो एक चमत्कार था। गहरी समझबूझ के साथ बालक शिवराज चव्हाण ने विलक्षण वादन किया जिसे सुन कर श्रोतागण उसके सम्मान में उठ खड़े हुए। इस बालक को पुणे के कृष्णा सालुखे तालीम दे रहें हैं। शिवराज ने बताया कि पहली तालीम उन्हें अपने पिता से मिली है। वे इससे पहले भी कई कार्यक्रम कर चुके हैं। उन्हें शास्त्रीय संगीत अच्छा लगता है।