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Ayodhya News: छात्रवृत्ति और कलाकार पेंशन योजना को प्रभावी बनाए सरकार

Mon, 02 Feb 2026 09:05 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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04-पूजा आठवले व सायली तलवलकर
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नितिन मिश्र
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अयोध्या। शास्त्रीय संगीत की परंपरा और साधना को समर्पित चार दिवसीय आवासीय संगीत सम्मेलन का रामनगरी में भव्य शुभारंभ हुआ है। सम्मेलन का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। देशभर से आए कलाकारों, गुरुजनों और संगीत साधकों की उपस्थिति में सम्मेलन ने शास्त्रीय कला के संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया।
अमर उजाला से बात करते हुए कलाकारों ने एकमत से कहा कि शास्त्रीय संगीत भारतीय संस्कृति की आत्मा है, लेकिन बदलते समय में इसके संरक्षण के लिए ठोस प्रयास आवश्यक हैं। कलाकारों ने एक स्वर में कहा कि शास्त्रीय संगीत केवल मंचीय कला नहीं, बल्कि जीवन मूल्य और सांस्कृतिक पहचान का आधार है, जिसे निरंतर संरक्षण और प्रोत्साहन की आवश्यकता है।
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विद्यालय स्तर से ही मिले शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा
मुंबई की प्रसिद्ध कलाकार पूजा आठवले व सायली तलवलकर ने कहा कि यदि विद्यालय स्तर से ही शास्त्रीय संगीत और नृत्य को बढ़ावा दिया जाए, तो हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रह सकती है। ऐसे आवासीय सम्मेलनों का आयोजन अधिक से अधिक होना चाहिए। इससे न केवल कलाकारों को साधना का अवसर मिलता है, बल्कि युवा पीढ़ी को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने की मजबूत कड़ी भी बनती है। राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय संगीत समारोहों का नियमित आयोजन होना चाहिए, इससे कलाकारों को रोजगार मिलेगा।
कायम रहनी चाहिए शास्त्रीय संगीत की परंपरा प्राचीन
थाणे महाराष्ट्र से आए सुरेश बापट ने कहा कि सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि आज के दौर में शास्त्रीय संगीत को संस्थागत सहयोग और नियमित मंच मिलने की जरूरत है। ऐसे आवासीय सम्मेलन साधकों के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं। कहा कि शास्त्रीय संगीत की परंपरा प्राचीन है, यह हमारे संस्कृति का अभिन्न अंग है, इसे कायम रहना चाहिए। सरकार को छात्रवृत्ति और कलाकार पेंशन जैसी योजनाओं को और प्रभावी बनाना चाहिए। दूरदर्शन, आकाशवाणी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शास्त्रीय संगीत को अधिक प्रसारण और मंच मिले।
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शास्त्रीय संगीत के संरक्षण के लिए बने स्थायी मंच
पुणे की कलाकार यशस्वी सरपोतदार ने कहा कि शास्त्रीय कला हमारी जड़ों से जुड़ी है। यदि बच्चों और युवाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो यह परंपरा और अधिक सशक्त होगी। आज कई प्रतिभाशाली कलाकार संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाते हैं। सरकार और समाज दोनों को मिलकर शास्त्रीय संगीत के संरक्षण के लिए स्थायी मंच और छात्रवृत्ति की व्यवस्था करनी चाहिए। शास्त्रीय संगीत और नृत्य के लिए स्थायी सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना की जाए।

04-पूजा आठवले व सायली तलवलकर

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