अशोक सिंहल के साथ बीच में मौजूद त्रिलोकी नाथ पांडेय (फाइल फोटो)
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राम जन्मभूमि मामले में ‘रामलला के सखा’ के रूप में करीब 34 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले स्वर्गीय पंडित त्रिलोकीनाथ पांडेय के परिवार को ही रामलला के दर्शन के लिए चार दिन तक भटकना पड़ा। सावन झूला मेले के दौरान अयोध्या पहुंचे परिवार के सदस्यों का आरोप है कि उन्हें अलग-अलग स्थानों पर भेजा जाता रहा, लेकिन रामलला के दर्शन नहीं हो सके। सावन पूर्णिमा पर रामलला का झूला भी उतर गया, मगर परिवार दर्शन से वंचित रह गया।
पंडित त्रिलोकीनाथ पांडेय के बेटे अमित पांडेय के मुताबिक, उनकी मां कमलादेवी, भाई और परिवार के अन्य सदस्य रामलला के दर्शन के लिए अयोध्या आए थे। चार दिनों तक दर्शन की उम्मीद में व्यवस्था के निर्देशों का पालन करते हुए परिवार अलग-अलग जगहों पर जाता रहा। बावजूद इसके दर्शन नहीं मिल सके। अमित पांडेय का कहना है कि उनके पिता ने राम मंदिर की कानूनी लड़ाई को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया था। घर-परिवार से अधिक उन्होंने रामकाज को प्राथमिकता दी। ऐसे में जिस परिवार के मुखिया ने दशकों तक रामलला के अधिकार के लिए अदालत में संघर्ष किया, उसी परिवार को दर्शन के लिए भटकना पड़े, यह बेहद पीड़ादायक है।
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परिवार ने इस मामले में तीन मांगें रखी हैं। इनमें परिजनों के लिए रामलला के दर्शन की सुगम व्यवस्था, परिवार के प्रति उचित सम्मान तथा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न होने देने के लिए व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग शामिल है। साथ ही ट्रस्ट में परिवार के एक सदस्य को स्थान देने की भी मांग उठाई ।
अमित पांडेय ने कहा कि सवाल सिर्फ दर्शन का नहीं, बल्कि उनके पिता के योगदान और सम्मान का है। उन्होंने कहा कि त्रिलोकीनाथ पांडेय ने अपना जीवन रामकाज को समर्पित किया था, ऐसे में उनके परिवार को रामलला के दर्शन के लिए चार दिन तक भटकना दुर्भाग्यपूर्ण है।