अयोध्या में चढ़ावा चोरी मामला।
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समय का खेल भी अजीब है... कुछ माह पहले तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रहते हुए कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने वाले चंपत राय अब रामनगरी के मठ-मंदिरों के छोटे-बड़े आयोजनों में लगातार नजर आ रहे हैं। जन्मदिन समारोह हो, मंदिर का उत्सव हो या कोई धार्मिक अनुष्ठान, चंपत राय की मौजूदगी इन दिनों लगभग हर जगह दिखाई दे रही है। वह साधु-संतों से मुलाकात कर रहे हैं। उनका आशीर्वाद ले रहे हैं।
बदली परिस्थितियों में चंपत राय की सक्रियता का यह नया अंदाज चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इस सक्रियता के पीछे संदेश क्या है। खासकर इसलिए कि यह सक्रियता ऐसे समय में बढ़ी है, जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की दो सितंबर को महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। बैठक में ट्रस्ट के महासचिव, प्रवक्ता, सीईओ व खाली पड़े पदों पर नियुक्ति किए जाने की पूरी उम्मीद है।
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संतों के बीच चर्चा है कि वह अपने पुराने संपर्कों को फिर से मजबूत कर रहे हैं। इसे राम मंदिर ट्रस्ट में संभावित वापसी के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि चंपत राय की ट्रस्ट में वापसी को लेकर अभी कोई आधिकारिक स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन उनकी बढ़ती सक्रियता ने इन अटकलों को हवा जरूर दे दी है।
निमंत्रण हो या न हो, संतों के बीच पहुंच रहे
विश्व हिंदू परिषद से जुड़े एक कार्यकर्ता के अनुसार, चंपत राय इन दिनों रामनगरी के मठ-मंदिरों में होने वाले आयोजनों में लगातार पहुंच रहे हैं। जहां औपचारिक निमंत्रण है, वहां कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं और जहां निमंत्रण नहीं भी है, वहां संतों से व्यक्तिगत मुलाकात के लिए पहुंच रहे हैं। साधु-संतों से संवाद, आशीर्वाद और आत्मीय मुलाकातों के सिलसिले के मायने निकाले जा रहे हैं।
क्या वापसी के लिए तैयार हो रही जमीन
ट्रस्ट की बैठक से पहले चंपत की सक्रियता को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे ट्रस्ट में अपनी वापसी के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं। क्या संतों से लगातार संवाद और आशीर्वाद लेने के पीछे पुराने समर्थन को फिर से मजबूत करने का प्रयास है, या फिर यह केवल रामनगरी से उनके पुराने जुड़ाव और व्यक्तिगत संबंधों का परिणाम है। इन सवालों का जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं है।