- वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता एवं पूर्व मंत्री आलोक खरे ने बताया कि आरोपपत्र न्यायालय में आने के बाद नियमानुसार आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी। आरोपियों को आरोपपत्र और संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके बाद न्यायालय आरोपों पर विचार कर आरोप तय करेगा। आरोप तय होने के बाद अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान दर्ज होंगे और उपलब्ध साक्ष्यों व गवाहों की गवाही के आधार पर अदालत मामले का निर्णय करेगी।
मुख्य आरोपियों को मुलजिम न बनाना विवेचक की बड़ी कमी
- बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सूर्य नारायण सिंह ने कहा कि न्यायालय में दाखिल आरोपपत्र में कार्रवाई तो हुई है, लेकिन मुख्य आरोपियों को मुलजिम नहीं बनाया जाना विवेचना की बड़ी कमी है। उनका कहना है कि इसी बिंदु को लेकर अधिवक्ता संघ लगातार सवाल उठा रहा है। वहीं पूर्व मंत्री गिरीश तिवारी ने कहा कि आरोपपत्र से अधिवक्ताओं में निराशा है। उनका आरोप है कि संघ की ओर से दिए गए शपथपत्रों और दर्ज कराए गए बयानों के आधार पर पर्याप्त जांच नहीं की गई और न ही इस संबंध में अपेक्षित साक्ष्य संकलित किए गए।