अयोध्या। न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुए हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर मामलों की जांच में विवेचक की गंभीर लापरवाही सामने आई है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट तृतीय बलराम दास ने पीड़ित के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए विवेचना अधिकारी की ओर से हटाए गए हत्या के प्रयास के अपराध को आरोप पत्र में पुनः जोड़ दिया है।
अपराध की गंभीरता को देखते हुए, पत्रावली को सत्र न्यायाधीश की अदालत में सुनवाई के लिए प्रेषित करने का आदेश पारित किया गया है। आरोपियों को जिला जज की अदालत में 10 अप्रैल को पेश होने के लिए तारीख नियत की गई है। यह मामला वर्ष 2022 का है, जब थाना इनायत नगर क्षेत्र में एक घटना हुई थी। 28 मई की सुबह करीब छह बजे महेंद्र सिंह पर मनोज कुमार, राजेंद्र, संदीप, संतोष और कमलेश कुमारी ने लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया था। हमले में महेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें बेहोशी की हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई रिपोर्ट
घटना की रिपोर्ट पहले थाना इनायत नगर में दर्ज नहीं हुई थी, जिसके बाद पीड़ित ने अदालत का सहारा लिया। न्यायालय के आदेश पर आरोपियों के विरुद्ध हत्या के प्रयास सहित आधा दर्जन गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। हालांकि, विवेचना के बाद विवेचक ने जानबूझकर हत्या के प्रयास की धारा को हटाकर केवल मारपीट और धमकी देने का आरोप पत्र न्यायालय भेजा था। अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट में आई गंभीर चोटों और पीड़ित के बेहोशी की हालत को हत्या के प्रयास का पर्याप्त साक्ष्य मानते हुए पीड़ित का प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया। एसीजेएम बलराम दास ने अपराध को सेशन ट्रायल योग्य मानते हुए पत्रावली को जिला जज की अदालत में भेजे जाने का आदेश पारित किया।