अयोध्या। सीतापुर आंख अस्पताल परिसर में 300 बेड के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के निर्माण के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने हरी झंडी दे दी है। इससे मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करने का दावा किया जा रहा है।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही जिले में देश-दुनिया के लोगों की आमद एकाएक कई गुना बढ़ गई है। हर समय वीवीआईपी गतिविधियां होती रहती हैं। साथ ही छह प्रांतीयकृत मेलों के दौरान भीड़ और बढ़ जाती है। इस लिहाज से जिले की स्वास्थ्य सेवाएं नाकाफी प्रतीत होती हैं, जिन्हें सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री ने साल भर पहले ही चिंता जाहिर की थी। इसके लिए उन्होंने 300 बेड के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनवाने का एलान किया था।
साहबगंज क्षेत्र में लंबे समय से निष्प्रयोज्य पड़े सीतापुर आंख अस्पताल परिसर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह अस्पताल बनाने का निर्णय लिया गया। इसके लिए 163.71 करोड़ रुपये स्वीकृत करके लोकनिर्माण विभाग को कार्यदायी संस्था नामित किया गया। 28 जून, 2025 को 48 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी हुई, लेकिन बगल में गुलाबबाड़ी स्थित होने के कारण एएसआई की एनओसी अनिवार्य हो गई। इस कारण से प्रक्रिया लंबित हो गई।
अमर उजाला ने 13 फरवरी के अंक में ''''एनओसी के बिना लटक गया अस्पताल का निर्माण'''' शीर्षक खबर प्रकाशित की तो विभाग में हलचल मची। जिलाधिकारी निखिल टीकाराम फुंडे के अलावा श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी मामले का संज्ञान लिया। इसके लिए उन्होंने पीएमओ तक संपर्क साधा, जिसका परिणाम रहा कि 28 फरवरी को ही एएसआई ने एनओसी जारी कर दी।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता उमेश चंद्र ने बताया कि एएसआई की ओर से चार मार्च को अनापत्ति प्रमाण पत्र मिला है। अब अस्पताल बनाने के लिए प्रक्रिया तेज की गई है। मृदा परीक्षण कराया जा चुका है। निर्माण इकाई से अनुबंध कराने की प्रक्रिया चल रही है। भूमि समतलीकरण कराया गया है। तीन-चार दिन में ही निर्माण कार्य शुरू होगा।