अयोध्या। पिता की बीमारी का बहाना बनाकर दोस्त की बहन का बैंक खाता लेकर फ्राड के सहारे लाखों की ठगी करने के मामले में आरोपी हर्षित पाण्डेय को कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय ने आरोपी के अपराध की गंभीरता को देखते हुए अग्रिम जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया।
अभियोजन के अनुसार सुधांशु तिवारी कुचेरा के एक स्कूल में पढ़ता था उसी दौरान हर्षित पांडेय से दोस्ती हो गई। मार्च 2025 में हर्षित ने बताया कि उसके पिता की तबीयत खराब है। उधार लेकर इलाज करवाना है। हर्षित के कहने पर सुधांशु ने अपनी बहन का बैंक खाता दे दिया। बाद में बहन का बैंक खाता सीज हो गया। सीज होने का कारण पता करने पर हर्षित पांडेय व रौनक की ओर से फ्रॉड करके खाते में पैसा मंगाए जाने की जानकारी हुई।
सुधांशु की तहरीर पर थाना कोतवाली अयोध्या में अभियोग दर्ज किया गया। एडीजीसी फौजदारी ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी हर्षित पांडेय ने 105830 रुपये का फ्रॉड किया गया है। जिसके संबंध में बिहार प्रदेश के पटना जिले में भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
न्यायाधीश ने पत्रावली पर मौजूद तथ्यों एवं जमानत का कोई पर्याप्त आधार न पाते हुए आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त कर दिया।