अयोध्या। अयोध्या की पावन धरती पर सावन मास की हरियाली के संग भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा है। रामनगरी के मंदिरों की पवित्र घंटियों के साथ गीत-संगीत की मधुर लहरियां प्रवाहित हो रही हैं। हर मंदिर जैसे झूलन की छटा में रंगा हो, हर प्रांगण में जैसे राग-रागिनियां गूंज रही हों। रामनगरी में सैकड़ों मंदिरों में सावन उमड़ आया है। इस सावन का साक्षी बनने के लिए देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं।
सरयू तट स्थित प्राचीन पीठ लक्ष्मण किला में सावन की अनूठी छटा बिखर रही है। शाम होते ही मंदिर के जगमोहन में जैसे की कजरी की धुन गूंजती है, श्रद्धालु बरबस आकर्षित होकर उमड़ पड़ते हैं। सखियों के नृत्य उत्सव की भव्यता बढ़ाते हैं। महंत मैथिलरमण शरण मंद-मंद गति से झूले पर विराजमान भगवान सीताराम के विग्रह को झुलाकर असीम आनंद की अनुभूति करते हैं। जनकपुर लागत तीज सुहाई, रंग रंगीली अतिहिं छबीली सब मिलि झूलन आई। सावन मनभावन पिय प्यारी अवनी सहज सुहाई....जनकपुर से आई सखियों की यह प्रस्तुति सभी को मुग्ध करती है। मंदिर के अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण बताते हैं कि रोजाना रात आठ बजे से 11 बजे तक सरयू के समानांतर ही गीत-संगीत की धारा भी प्रवाहित हो रही है, जिसमें डुबकी लगाकर श्रद्धालु आह्लादित होते हैं।
कनक भवन परिसर स्थित लाल साहब दरबार का झूलनोत्सव भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कनक बिहारी सरकार के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं का रेला लाल साहब दरबार के झूलनोत्सव का साक्षी बनने उमड़ रहा है। महंत रामनरेश शरण ने बताया कि भगवान सीताराम के विग्रह को रजत हिंडोले पर विराजमान कर रोजाना शाम उनके सम्मुख सांस्कृतिक संध्या का आयोजन होता है। प्यारी झूलन पधारो झुकी आई बदरा, सजी भूषण बसन अखियन कजरा....जैसे झूलनोत्सव को समर्पित पदों की तान जब गूंजती है तो भक्तों के कदम स्वयं ही थिरकने लगते हैं। सावन में अयोध्या न केवल धार्मिक आस्था बल्कि सांस्कृतिक समृद्धि की जीवंत मिसाल भी बन रही है।