जैन मंदिर में विद्वत सम्मेलन के समापन पर मौजूद अतिथि व अन्य।
अयोध्या। राष्ट्रीय जैन विद्वत सम्मेलन का समापन गहन चिंतन, आध्यात्मिक संवाद और समाजोपयोगी निष्कर्षों के साथ रविवार को हुआ। देशभर से आए जैन आचार्यों, मुनियों और विद्वानों ने धर्म, संस्कृति, शिक्षा और वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। सम्मेलन का मुख्य संदेश अहिंसा, संयम, सद्भाव और आत्मशुद्धि के मूल सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने पर केंद्रित रहा।
विद्वानों ने कहा कि आज के दौर में जैन दर्शन की प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है, जो मानवता को शांति, सहिष्णुता और नैतिक जीवन की दिशा दिखाता है। समापन सत्र में जैन मंदिर रायगंज के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि जैन दर्शन केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक वैज्ञानिक और व्यावहारिक पद्धति है। यदि समाज अहिंसा, अपरिग्रह और संयम को अपने जीवन में अपनाए तो अनेक सामाजिक समस्याओं का स्वतः समाधान हो सकता है। वर्तमान समय में युवाओं को विशेष रूप से जैन सिद्धांतों से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि संस्कारित और सशक्त समाज का निर्माण हो सके।
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन न केवल विद्वानों के बीच संवाद का माध्यम बनते हैं, बल्कि समाज को नई दिशा और ऊर्जा देने का कार्य भी करते हैं। इससे पहले जैन धर्म के प्रचार-प्रसार में अहम योगदान देने वाले समाज के 20 से अधिक लोगों को सम्मानित किया गया। संचालन डाॅ. जीवन प्रकाश जैन ने किया। समापन कार्यक्रम में प्रो़ अभय कुमार जैन, एनआईटी पटना के निदेशक प्रदीप कुमार जैन, आईएएस सुरेश चंद्र जैन भोपाल, महामंत्री विजय कुमार जैन सहित विभिन्न प्रांतों से आए पदाधिकारी मौजूद रहे।