अयोध्या। श्रीरामलला का वीआईपी दर्शन कराने के नाम पर जालसाजों ने श्रद्धालु से 4,000 रुपये ठग लिए। मंदिर के गेट पर सुरक्षाकर्मियों ने पास फर्जी होने की जानकारी दी तो श्रद्धालु ने नगर कोतवाली में एक महिला समेत तीन जालसाजों के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
पंजाब के लुधियाना शहर के पंचशील बिहार बाड़ेवाल रोड लोथी एन्क्लेव निवासी संजीव कुमार गुप्ता ने दर्ज एफआईआर में बताया कि वह पत्नी काजल गुप्ता के साथ शुक्रवार को अयोध्या आए। एयरपोर्ट के पास स्थित एक होटल में वह ठहरे थे। दोपहर दो बजे के बाद वह होटल से बाहर निकले तो जयकेश सिंह नामक व्यक्ति मिला। उसके साथ मीनाक्षी नामक एक महिला भी थी।
उन लोगों ने उन्हें वीआईपी दर्शन कराने व गाइड दिलाने का झांसा दिया और 4,000 रुपये मांगे। जयकेश सिंह ने अपना पता सुल्तानपुर के कूरेभार थाना क्षेत्र के महमूदपुर बताया। वर्तमान में शहर के अवधपुरी कॉलोनी के पास रहने की जानकारी दी। अधिक भीड़ देख व तीनों लोगों पर विश्वास करके उन्होंने 4,000 रुपये उन्हें दे दिए। उन्होंने सतेंद्र तिवारी नामक एक गाइड उपलब्ध कराया और ब्लैक एंड व्हाइट वीआईपी पास दिया।
टैक्सी से वह लोग मंदिर के गेट पर पहुंचे, जहां पर सुरक्षाकर्मियों ने पास फर्जी होने की जानकारी दी। गाइड सतेंद्र तिवारी ने जयकेश को फोन करके रंगीन पास मांगा। सतेंद्र तिवारी प्रिंट निकलवाकर लाया तो वह भी फर्जी निकला। बताया कि मीनाक्षी और जयकेश ने मिलकर उन्हें कूटरचित पास दिया, जिससे वह और उनकी पत्नी काफी परेशान हुईं। नगर कोतवाल अश्विनी पांडेय ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करके छानबीन की जा रही है। कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इससे जुड़े गिरोह का जल्द खुलासा किया जाएगा।
वीआईपी दर्शन के नाम पर पहले भी ठगी हो चुकी है। एसओजी टीम ने कई लोगों को वीआईपी दर्शन कराने के आरोप में गिरफ्तार किया था। मामला कई दिन तक सुर्खियों में रहा। इसमें कुछ रसूखदारों का नाम भी सामने आया था। कुछ दिन तक सख्ती रही, लेकिन अब भी लगाम नहीं लग सकी है।
सूत्रों के अनुसार जालसाजों ने कंप्यूटराइज्ड पास बनाया था। यह देखने में ट्रस्ट की ओर से जारी पास के जैसे ही लग रहा था। इसे देखकर इसके फर्जी होने का अनुमान नहीं लग रहा था, लेकिन क्यूआर कोड के जरिये सुरक्षाकर्मियों ने इसे पकड़ लिया।